हरियाणा में करीब नौ साल से कृषि विकास अफसरों (एडीओ) की भर्तियां लटकी हुई हैं। जबकि प्रदेश में इन अफसरों की सेवानिवृत्ति के साथ-साथ ये पद और रिक्त होते जा रहे हैं। इस वजह से न केवल फील्ड में कृषि योजनाओं को लागू करने में दिक्कतें आ रही हैं, बल्कि इनके रूप में सरकार व किसान के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी भी कमजोर हो रही है। फील्ड में सक्रिय ये वे अफसर हैं जो कृषि विभाग में सरकारी नीतियों व योजनाओं से किसानों को जोड़ने में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं।
इसी के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने अब एक ऐसा फैसला किया है। जो लागू होते ही विवादों में घिर गया हैं। सरकार अब रिक्त कृषि विकास अधिकारियों के अधिकृत पदों पर आउटसोर्सिंग पर एग्रीकल्चर सुपरवाइजरों की भर्तियां करेगी। सभी जिलों में कृषि उप निदेशकों की भर्ती संबंधी जिम्मेदारी लगाई गई हैं। इन्हें डीसी रेट वेतन पर रखा जाएगा और ये सुपरवाइजरों का एग्रीकल्चर ग्रेजुएट होना अनिवार्य है। दूसरी ओर विभाग के रेगुलर कृषि विकास अधिकारियों के संगठन ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
उनका कहना है कि सालों से एग्रीकल्चर ग्रेजुएट युवा पक्की भर्तियों का इंतजार कर रहे हैं और सरकार डीसी रेट पर इन पदों पर एग्रीकल्चर सुपरवाइजरों की भर्ती कर रही है, जोकि अनुचित है। इसलिए इसका विरोध जारी रहेगा। बताते चलें कि हरियाणा में कृषि विभाग के तहत कृषि विकास अधिकारियों के करीब 1073 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से 731 पदों रिक्त हैं। अधिकारियों की इसी कमी की वजह से मौजूदा कृषि विकास अफसर भी अतिरिक्त कार्यभार और वर्क लोड के भार तले दबे हुए हैं।
इसलिए सालों से लटकी हैं भर्तियां
कृषि विभाग के सूत्रों ने बताया कि ये भर्तियां इसलिए सालों से लटकी हुई हैं, क्योंकि अभी तक इन भर्तियों से संबंधित इनके सर्विस रुल्स ही फ्रेम नहीं हुए हैं। विभाग ने इन भर्तियों के लिए एचपीएससी को लिखा था। मगर वहां इस बात पर आब्जेक्शन लग गई कि पहले इस पद से संबंधित सर्विस रूल्स फ्रेम किए जाएं। उसके बाद ही भर्तियों को सिरे चढ़ाया जा सकेगा।
किसानी के लिए अहम है इन अफसरों की भूमिका
सरकार और किसानों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करने वाले ये कृषि विकास अधिकारी बीजों व कृषि के तरीकों पर नई रिसर्च एवं तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर उन्हें इसका इस्तेमाल करने को प्रेरित करते हैं। बीज उपचार विधि, बीमा योजना, फसल विविधीकरण इत्यादि के लिए यही अफसर किसानों को जोड़ते हैं। फील्ड में ओलावृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं की वजह से फसलों के नुकसान का अपडेट भी विभाग को यही अफसर करते हैं। साल में कितनी बारिश पड़ी, उसका फसलों पर क्या असर रहा, यही अफसर विभाग को अपडेट करते हैं। किसान मेलों व शिविरों के लिए विभिन्न गांवों से किसानों को एकत्रित कर उन्हे ऐसे आयोजनों का हिस्सा बनाने में भी इन अफसरों की बड़ी भूमिका रहती है।
राज्य सरकार की आउटसोर्सिंग नीति के माध्यम से कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) के प्रत्येक स्वीकृत पद के विरुद्ध अतिरिक्त मैनपावर एग्रीकल्चर सुपरवाइजर की व्यवस्था की जा रही है। उपनिदेशक कृषि संबंधित जिले की अधिकृत आउटसोर्सिंग एजेंसी से आउटसोर्सिंग नीति के माध्यम से एडीओ के प्रत्येक स्वीकृत पद के लिए एक व्यक्ति की व्यवस्था करेगा। उम्मीदवार एक कृषि स्नातक होगा और संबंधित जिले में पर्यवेक्षक के लिए संबंधित डीसी दर पर अर्धकुशल व्यक्ति के मासिक वेतन का हकदार होगा। ये आउट सोर्स व्यक्ति पूरे वर्ष काम करेंगे।
- संजीव कौशल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग, हरियाणा