पंजाब सरकार की नीतियों के खिलाफ राज्य के अध्यापकों का जगह-जगह पानी की टंकियों या ऊंचे टावरों पर चढ़कर विरोध करने का सिलसिला लगातार जारी है। शनिवार को मोहाली में जहां आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने पानी की टंकी पर चढ़े बेरोजगार टीचरों से बातचीत कर उन्हें भरोसा जताया, वहीं चंडीगढ़ में पंजाब एमएलए हॉस्टल में बीएसएनएल के टावर पर पंजाब का एक कांट्रैक्ट टीचर पेट्रोल की बोतल लेकर चढ़ गया। वह 180 टीचरों को नौकरी से हटाने का विरोध कर रहा है। उसका कहना है कि उसका वेतन 65 हजार से घटाकर 25 हजार कर दिया है। वहीं शिक्षा सचिव ने उससे फोन पर बात करके समस्या के समाधान का भरोसा दिया, लेकिन टीचर टावर पर डटा हुआ है।
टावर पर चढ़े टीचर को उतारने के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने कोशिश की तो उसने खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया और टावर से कूदने की धमकी दी। टीचर का नाम स्वर्ण सिंह है और बरनाला के बदरी प्राइमरी स्कूल में कार्यरत है। दोपहर करीब ढाई बजे पंजाब शिक्षा विभाग के सचिव ने मौके पर पहुंचकर मोबाइल फोन के जरिए स्वर्ण सिंह से बात की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका और देर शाम तक स्वर्ण सिंह टावर पर ही काबिज था।
जानकारी के अनुसार, स्वर्ण सिंह शनिवार सुबह 4 बजे बीएसएनएल के टावर पर चढ़ा। उसे सबसे पहले एमएलए हॉस्टल के ड्राईक्लीनर ने देखा और उसे आवाज दी, लेकिन स्वर्ण सिंह ने टावर से उतरने से इनकार कर दिया। वह बार-बार एक ही बात दोहरा रहा था कि उसका वेतन 65 हजार से घटाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है।
टीचर टावरों पर चढ़ेंगे तो बच्चे भी यही करेंगे
शनिवार दोपहर पंजाब के शिक्षा सचिव भी एमएलए हॉस्टल में टावर पर चढ़े स्वर्ण सिंह से बात करने पहुंचे। मोबाइल के जरिए उन्होंने करीब पांच मिनट ही बात की, लेकिन वह स्वर्ण सिंह को नीचे उतरने के लिए मना नहीं सके। सचिव ने पहले तो स्वर्ण सिंह के उनकी पोस्टिंग और समस्या की जानकारी ली। उन्होंने स्वर्ण सिंह को भरोसा दिलाया कि विभाग उसके साथ है और वह जल्द से जल्द मसले को हल कराएंगे। लेकिन स्वर्ण सिंह जब अपनी जिद पर अड़ा रहा तो सचिव ने उनसे कहा कि कल आपका बच्चा भी हर चीज के लिए ऐसे ही जिद करेगा और छत पर चढ़ जाया करेगा, क्योंकि उसे पता होगा कि उसका पिता भी अपनी बात मनवाने को टावर पर चढ़ जाता था। सचिव ने यह भी कहा कि बच्चे टीचरों को ही उदाहरण मानते हैं और वह भी अपनी बात मनवाने के लिए ऐसे ही कदम उठाना सीख लेंगे।
2016 में भर्ती हुआ था स्वर्ण सिंह
टावर से स्वर्ण सिंह ने एक लिखित पर्चा फेंककर अपनी बात मीडिया तक पहुंचाई, जिसमें उसने लिखा है कि वह अकाली-भाजपा सरकार के समय टीचर भर्ती हुआ था और उसे पक्का भी कर दिया। लेकिन कांग्रेस सरकार ने 2018 में उसे नए सिरे से प्रोबेशन पीरियड में डाल दिया और वेतन भी 65 हजार रुपये मासिक से घटाकर 25 हजार रुपये कर दिया। स्वर्ण सिंह का कहना है कि वह 2016 में भर्ती हुआ था। 2016 के दौरान 4500 और 2005 ईटीटी टीचर के रूप में दो अलग-अलग भर्ती अभियान चलाए गए थे। यह दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चलीं, जिसमें मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों का चयन हुआ था। लेकिन विभाग की तरफ से दोनों भर्तियों में नौकरी सुरक्षित होने का हवाला देते हुए किसी एक भर्ती में नियुक्ति का आप्शन देने को कहा। इस तरह 4500 ईटीटी अध्यापकों ने नियुक्ति हासिल कर ली। इनमें जो जूनियर थे, उन्होंने 2005 पदों की भर्ती में ज्वाइन कर लिया, जिसके बाद भी सामान्य वर्ग के 150 पद खाली रह गए। करीब दो साल बाद 2018 में 4500 ईटीटी अध्यापकों की भर्ती में तय सीमा से अधिक भर्ती का हवाला देते हुए विभाग ने 180 अध्यापकों को नौकरी से निकालने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। यह अध्यापक अदालत पहुंचे तो पांच साल बाद अदालती आदेश पर विभाग ने इन्हें नौकरी पर लेते हुए बीते 5 साल की सेवा खत्म कर दी और उन्हें नए वेतनमान के आधार पर नियुक्ति दी। इसके बाद से इन अध्यापकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही। नए वेतनमान में इन अध्यापकों का वेतन भी 65 हजार से घटाकर 25 हजार कर दिया गया। स्वर्ण सिंह ने बताया कि उसकी फाइल शिक्षा विभाग के कार्यालय में पड़ी है, जिसे मंजूरी नहीं दी जा रही।
सुखबीर और मजीठिया ने की स्वर्ण सिंह से बात
अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल और बिक्रम मजीठिया ने, जो अन्य नेताओं के साथ शनिवार को मुख्यमंत्री चन्नी का आवास घेरने निकले थे, एमएलए हॉस्टल में टावर पर चढ़े स्वर्ण सिंह से मोबाइल के जरिए बात की और उसे नीचे उतारने के लिए मनाने का भरसक प्रयास किया। इस दौरान सुखबीर और मजीठिया ने शिक्षा मंत्री परगट सिंह से भी फोन पर बात की और उन्हें वस्तुस्थिति की जानकारी देते हुए तुरंत कोई कदम उठाने को कहा। सुखबीर बादल ने अनुबंधित अध्यापकों को झूठे आश्वासन देने के लिए मुख्यमंत्री तथा शिक्षा मंत्री की निंदा भी की।