वहीं माइक लिए एक आयोजक भाषण देते हुए मुख्य अतिथि मैडम को बता रहा है कि ‘ मैडम जी, एधर वेखो, कोई फिक्र नहीं लाइनां दी उन्हानूं, भले पंज सौ गड्डियां लंग जाण, पंज हजार बंदा लाइनां ते खलौता होआ है...’ इस भाषण के बाद मौके पर रावण दहन होता है और पटाखों की तेज आवाज गूंजने लगती है। लेकिन तभी अचानक दो ट्रेनें तेज रफ्तार से वहां से पहुंचती है और ट्रैक पर खडे़ दर्शकों को कुचलती हुई गुजर जाती है। आयोजक समिति के सदस्य यदि समय रहते मंच से इन लोगों को ट्रैक से हटकर दशहरा देखने की अपील करते, तो शायद ये जानें बच जाती।