18 मार्च को अमृतपाल सिंह का श्री मुक्तसर साहब में कार्यक्रम था। इसकी रूपरेखा पुलिस व खुफिया एजेंसियों के पास थी। पुलिस की योजना थी कि अमृतपाल सिंह को माझा में गिरफ्तार न किया जाए, क्योंकि यहां गर्मख्याली बड़ी संख्या में हैं और अमृतपाल के समर्थकों की तादाद भी कम नहीं है। लिहाजा, योजना बनाई गई थी कि अमृतपाल सिंह को मोगा बार्डर पर पकड़ा जाए। यानी दोआबा से जब वह मालवा की तरफ जाने लगे तो उसको गिरफ्तार कर लिया जाए।
अमृतपाल सिंह अपने घर से चला तो रास्ते में गोइंदवाल साहिब से निकला। जो ऐतिहासिक स्थल है और यहां पर भी पुलिस कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थी। इसके बाद बाबा नानक की नगरी सुल्तानपुर लोधी से निकला, यह भी धार्मिक नगरी होने के कारण पुलिस ने इसका रास्ता नहीं रोका। लेकिन इसके बाद मल्सियां व शाहकोट का इलाका शुरू हो जाता है, जहां पर हरदम पुलिस का नाका रहता है।
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बताते हैं कि उस समय अमृतपाल सिंह मर्सिडीज कार में सवार था। बकायदा टोल प्लाजा क्रॉस किया और मोगा के एंट्री प्वाइंट पर भारी पुलिस बल देखकर उसने यू टर्न ले लिया। नेशनल हाईवे पर आकर उसने पुल के नीचे वह मर्सिडीज छोड़ ब्रेजा गाड़ी में सवार हो गया और अपनी टीम से अलग हो गया। पुलिस मर्सिडीज व इंडेवर गाड़ियों का पीछा करती रह गई। अमृतपाल सिंह ने टोल वापस क्रॉस किया और लिंक मार्ग पर ब्रीजा गाड़ी लेकर निकल गया।
हालांकि, अमृतसर के जल्लपुर खेड़ा गांव से लेकर शाहकोट तक 20 से अधिक स्थानों पर पुलिस की नाकेबंदी रहती है, लेकिन रास्ते में पुलिस ने अमृतपाल सिंह के वाहन नहीं रोके। मोगा समेत आठ जिलों की पुलिस ने जालंधर के देहात इलाके में जाल बिछाया हुआ था। बिल्कुल फिल्मी स्टाइल की भांति पुलिस मर्सिडीज कार की तलाश करती रही, लेकिन वह ब्रीजा गाड़ी में घूमता रहा।
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