1994 में दरमन शहर (नॉर्वे) में बसे अमृतपाल सिंह वहां के पहले पंजाबी सिख म्यूनिसिपल काउंसिलर बन गए हैं। नॉर्वे में हुए नगर काउंसिल चुनाव में अमृतपाल सिंह ने उम्दा प्रदर्शन किया। उन्होंने यह चुनाव होईरे पार्टी की टिकट पर लड़ा और 34 उम्मीदवारों को मात दी।
25 साल पहले अपने पिता निरपाल सिंह औजला के पास पढ़ाई पूरी करने गए अमृतपाल ने इकोनॉमिकस और फाइनेंस की मास्टर डिग्री नॉर्वे से प्राप्त कीं। वह नॉर्वे में इनकम टैक्स कमिश्नर बने। मौजूदा समय में वह बहु राष्ट्रीय कंपनी नौरशक हीदरो में बतौर डायरेक्टर सेवाएं दे रहे हैं और ट्रेड यूनियन की कार्यकारी समिति के सदस्य भी हैं।
मूलत: कपूरथला के अमृतपाल सिंह फतेहगढ़ साहिब के सरहिंद शहर के दामाद हैं। उनकी शादी डेंटल सर्जन मनदीप कौर से 2005 में हुई थी। उनकी सास परमजीत कौर सरहिंद लिखारी सभा फतेहगढ़ साहिब की महासचिव हैं और ससुर ऊधम सिंह गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में सेवामुक्त मैनेजर रह चुके हैं। परमजीत कौर ने वाहेगुरु का धन्यवाद करते हुए कहा कि वह किस्मत वाली हैं कि उन्हें काबिल दामाद मिला है। वहीं काउंसिलर बनने की सूचना मिलते ही अमृतपाल सिंह के ससुराल में बधाई देने वालों का तांता लग गया।
दस्तार ने दिलाई पहचान
अमृतपाल सिंह की सास परमजीत कौर सरहिंद ने बताया कि पिछले दिनों नॉर्वे सरकार ने जब सिखों को अपने कान नंगे कर फोटो खिंचवाकर अपने पासपोर्ट पर लगाने की हिदायत की तो अमृतपाल सिंह ने इसका विरोध किया था।
उन्होंने वहां यंग सिख ग्रुप और अन्य सिख संगठनों के साथ मिल कर इस मुद्दे को भारत सरकार तक पहुंचाया। वह इसके लिए खास तौर पर भारत आए और एक वफद को साथ लेकर नॉर्वे के सरकारी अफसरों से मिले। खुली बहस के बाद वहां की सरकार ने भरोसा दिया कि इस पर जल्द विचार करेंगे।