कैप्टन ने कहा कि कुछ निजी अस्पतालों को 40000 अतिरिक्त डोज मुहैया करवाना समय की जरूरत थी, ताकि 18-45 आयु वर्ग में गैर-प्राथमिकता समूहों को भी टीकाकरण करवाने के कुछ विकल्प दिए जा सकें। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को उसी कीमत पर टीके दिए गए, जिस कीमत पर उन्हें निर्माताओं से खरीदना था।
उन्होंने कहा कि यह फैसला इस कारण लिया गया था, क्योंकि शुरू में पंजाब में केवल दो निजी अस्पताल ही थे, जो केंद्र सरकार की ओर से आरक्षित 25 प्रतिशत कोटे में से टीके खरीदने में कामयाब रहे थे। उन्होंने कहा कि विदेश जाने वाले विद्यार्थियों और अन्यों को तुरंत टीकाकरण की जरूरत थी और वह भुगतान करने के लिए तैयार थे, इसलिए राज्य सरकार ने आपातकालीन उपाय के तौर पर ये टीके निजी अस्पतालों में उपलब्ध कराने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले को सही भावना से नहीं देखा जा रहा था, इसलिए इसे वापस ले लिया गया। फतेह किटों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सराहनीय है कि स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना लहर के शिखर के दौरान भी समय पर सप्लाई को सुनिश्चित किया। इन किटों में पल्स ऑक्सीमीटर भी उपलब्ध करवाए गए, हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कोई सप्लाई न मिलने के कारण इसकी कमी थी। वास्तव में पंजाब अन्य राज्यों की अपेक्षा कम मूल्य पर इसे खरीदने में कामयाब रहा। कैप्टन ने कहा कि मेरी सरकार ने हमेशा लोगों की जिंदगी बचाने को प्राथमिकता दी है और महामारी के दौरान राजनीतिक करना और गलत जानकारी फैलाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।