कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पाकिस्तान की तरफ से भारत के साथ राजनयिक संबंध घटाने के फैसले पर चिंता जाहिर करते हुए उम्मीद जताई है कि इस कदम का करतारपुर गलियारे के निर्माण पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान के इस कदम को बगैर सोची समझी और असामयिक कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि कश्मीर, भारत का अंदरूनी मामला है और इस संबंध में कोई भी फैसला लेने का भारत को अधिकार है। पाकिस्तान को इसे बहाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान का फैसला क्षेत्रीय सुरक्षा के हित में नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि दक्षिण-पूर्वी एशिया क्षेत्र की शांति को अस्थिर करने के लिए कोई भी ऐसा कदम पड़ोसी मुल्क के लिए भी घातक सिद्ध होगा।
इसके साथ ही कैप्टन ने उम्मीद जताई कि इस घटनाक्रम का करतारपुर गलियारे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और इसका काम रोक कर पाकिस्तान सिखों की भावनाओं को चोट नहीं पहुंचाएगा। राजसी जोड़-तोड़ को सिखों की धार्मिक भावनाओं पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
केंद्र सरकार से अपील
कैप्टन ने केंद्र से अपील की कि दोनों मुल्कों के दरमियान बने हालात के बावजूद वह करतारपुर गलियारे के मसले को इस्लामाबाद के समक्ष पहल के आधार पर उठाए और इसके निर्माण को यकीनी बनाए।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने से बौखलाए पाकिस्तान ने बुधवार को नई दिल्ली के साथ सभी राजनयिक संबंध तोड़ दिए। इस्लामाबाद में इस निर्णय की घोषणा करते हुए पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को भी अपना देश छोड़ने के आदेश दिए हैं।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि हम दिल्ली से अपने उच्चायुक्त को वापस बुला रहे हैं और उनके उच्चायुक्त को यहां से भेज रहे हैं। हालांकि भारत की तरफ से पहले ही जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न अंग बताकर उससे जुड़े मुद्दे को पूरी तरह अपना आंतरिक मामला बताते हुए पाकिस्तान के विरोध को खारिज किया जा चुका है।