जब लोगों से पूछा गया कि क्या सरकारी अस्पतालों की ओपीडी खोल देनी चाहिए तो अधिकतर लोगों ने इस पर सहमति जताई। करीब 62 फीसदी लोगों ने माना है कि ओपीडी में अब इलाज होना चाहिए। यह इस बात का भी इशारा है कि कोविड-19 के अलावा दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अब इलाज की सख्त जरूरत है।
प्राइवेट कैब व पब्लिक ट्रांसपोर्ट के शुरू होने पर भी लोगों ने अपनी राय दी है। 79 फीसदी लोग मानते हैं कि अभी इस पर रोक लगी रहनी चाहिए। जबकि 21 फीसदी लोग मानते हैं कि इसे शुरू कर देना चाहिए। लोगों की जरूरत है और बंद रहने से कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।
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लोगों ने माना कि वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं
कोरोना से बचाव के लिए सबसे जरूरी सोशल डिस्टेंसिंग है। सर्वे में शामिल 99 फीसदी लोगों ने माना है कि जब भी उनका बाहर निकलना होता है तो वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं। इससे एक बात पता चलती है कि लोगों में बचाव के प्रति जागरूकता है और वे सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देश का पालन करते हैं।
प्रयास जारी हैं, लोगों को साथ देना होगा: एडवाइजर
शहर में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कई तरह के कदम उठाए गए हैं। लेकिन संक्रमण को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता। दुनिया भर के वैज्ञानिक इसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं। चंडीगढ़ में भी इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। शहर में कोरोना वायरस फैलने के पैटर्न को देखते हुए प्रशासन ने अनुमान लगाते हुए विभिन्न कोविड अस्पतालों और केयर सेंटर में 3000 बेड तैयार कर लिए हैं, ताकि आपात स्थिति से निपटा जा सके।
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शहर के जिस हिस्से में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या ज्यादा है, उसके अनुसार ही अपनी रणनीति में बदलाव किए हैं। चंडीगढ़ में हमारी सफलता की कुंजी लोगों का सामाजिक व्यवहार होगा। शहरवासियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और प्रशासन का साथ देना होगा, तभी चंडीगढ़ कोरोना मुक्त हो सकता है। 17 मई के बाद शहर में लॉकडाउन बढ़ेगा या नहीं, यह केंद्र सरकार के फैसले के बाद ही तय किया जाएगा। चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है, ऐसे में केंद्र सरकार का जो भी फैसला होगा, उसे चंडीगढ़ में लागू किया जाएगा। शहरवासियों को कर्फ्यू में दी गई छूट केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत ही है।
अमर उजाला के दस रिपोर्टरों ने अलग-अलग वर्गों के 154 लोगों से सवाल पूछे। जवाब देने वालों में चंडीगढ़ के नौजवान, छात्र, कारोबारी, महिलाएं, बुजुर्ग, शिक्षक, प्रोफेसर, सरकारी कर्मचारी व अन्य लोग शामिल रहे। सर्वे का मकसद सिर्फ लोगों की राय जाननी थी कि वे प्रशासन के कामकाज को किस नजरिए से देखते हैं। सवाल उठ सकता है कि 154 लोगों से बातचीत करके नतीजे कैसे निकाले जा सकते हैं। दरअसल रैंडम सर्वे का मतलब सिर्फ अंदाजा लगाना होता है। जैसे चावल की बोरी खरीदनी हो तो एक मुट्ठी चावल लेकर उसकी क्वालिटी का पता चल जाता है।
पूछे गए सवाल और जवाब
1. क्या लॉकडाउन की सीमा को बढ़ाना चाहिए?
हां 137 (88.97)
नहीं 17 (11.03)
89 फीसदी लोगों ने माना कि लॉकडाउन बढ़ाया जाना चाहिए
2. चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से लॉकडाउन में जो छूट दी गई है, क्या वह सही है?
हां 57 37.01
नहीं 97 62.99
करीब 63 फीसदी लोगों ने छूट को गलत बताया है
3. कोरोना संकट के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन के कामकाज से आप संतुष्ट हैं?
हां 83 53.90
नहीं 71 46.10
करीब 54 फीसदी लोग काम से संतुष्ट
4. क्या आप मानते हैं कि चंडीगढ़ में कोरोना को रोकने में प्रशासन नाकाम रहा है?
हां 95 61.69
नहीं 59 38.31
करीब 62 फीसदी लोगों ने नाकाम रहा प्रशासन
5. क्या घर से निकलते वक्त आप सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं?
हां 153
नहीं 1
99 फीसदी लोगों ने माना कि वे पालन करते हैं
6. क्या सरकारी अस्पतालों की ओपीडी शुरू की जानी चाहिए?
हां 96 62.34
नहीं 58 37.66
62.34 लोगों ने माना कि ओपीडी खोल देनी चाहिए
7. प्राइवेट कैब और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को शुरू किया जाना चाहिए?
हां 32 20.78
नहीं 122 79.22
79.22 फीसदी लोगों ने माना कि अभी इन पर रोक रहनी चाहिए।