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पहले इन 10 समस्याओं का हल, फिर मिलेगा वोट

Sun, 14 Sep 2014 11:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बेहतर शिक्षा
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पंचकूला में यूनिवर्सिटी नहीं होने के कारण युवाओं को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। आईटी पार्क  के नाम पर अब तक महज खानापूर्ति की गई, इसलिए रोजगार के लिए भी यंगस्टर्स को दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

पानी की गुणवत्ता
कौशल्या डैम तैयार करने में 200 करोड़ से अधिक खर्च होने के बावजूद लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा है। डैम में फैक्ट्रियों और सीवर का पानी गिर रहा है, इस मामले की जांच क्यों नहीं की गई। सभी नागरिक को स्वच्छ पानी मुहैया कराना तय किया जाना चाहिए।
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दवाओं की कमी
एच-वन के तहत ड्रग्स प्रतिबंधित किए जाने का भी आम मरीजों पर काफी फर्क पड़ा है। कई जरूरी दवाईयां बाजार में कम हो गई हैं। जनरल अस्पताल की बात करें तो यहां सिर्फ वहीं दवाएं मिलती हैं, जिनकी कीमत कम है। इस मसले पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

सिंगल विंडो
चंडीगढ़ की तर्ज पर संपर्क केन्द्रों की स्थापना हो। इससे बिजली, पानी, प्रॉपर्टी टैक्स, लाइसेंस फी सहित अन्य शुल्क भी जमा कराए जा सकेंगे। इससे आम लोगों को काफी फायदा होगा, लेकिन इस पर किसी ने ध्यान देने तक की जरूरत नहीं समझी। यह चिंता की बात है।

सुरक्षा
अभी तक सुरक्षा के लिहाज से शहर में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं। पहले हुई लूट की वारदातों के बाद भी पुलिस-प्रशासन ने सबक नहीं सीखा। शहर में जिस तरह वारदातों का ग्राफ बढ़ रहा है, वैसे में सुरक्षा व्यवस्था और चाक-चौबंद करने की जरूरत है।

इन समस्याओं पर भी ध्यान दीजिए

एफएआर में बढ़ोतरी
चंडीगढ़ की तरह फ्लोर एरिया रेशो में भी बढ़ोतरी की जानी चाहिए। ऐसा नहीं होने की वजह से खरीदारों के साथ-साथ प्रॉपर्टी कारोबारियों को भी लगातार नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। सरकार चाहे जिसकी हो, इस पर ध्यान देना भी जरूरी है।

टैक्स का बोझ, पलायन कर रहे उद्यमी
टैक्स विसंगतियों के कारण उद्यमियों की परेशानी बनी हुई है। बड़े प्लॉट्स में फैक्ट्रियां लगाने वालों से कई तरह के टैक्स वसूले जा रहे हैं। इसलिए उद्यमियों ने हिमाचल प्रदेश की ओर रुख कर लिया है। अगर टैक्स विसंगतियों को दूर कर दिया जाए, तो औद्योगिक विकास की रफ्तार में तेजी के साथ-साथ पलायन भी रुकेगा।

मार्केट में अतिक्रमण, सुविधाओं का टोटा
अतिक्रमण और रेहड़ी, फड़ी के कारण करोड़ों खर्च करने वाले व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ता है। टॉयलेट्स की कमी और हुडा की ओर से इसे तैयार करने के बाद मेंटीनेंस के लिए मार्केट एसोसिएशनों को सौंपने के फॉमूले से भी कारोबारियों की दिक्कतें बनी हुई हैं। सुविधाओं पर ध्यान देना होगा।

कनवर्जन पॉलिसी
कनवर्जन पॉलिसी के कारण पंचकूला के औद्योगिक क्षेत्र में मॉल या दूसरे परिसर का निर्माण नहीं किया जा सकता है। अधिकतर उद्यमी इसे सही मानते हैं, जबकि कुछ उद्यमी इसमें संशोधन की बात कहते हैं। उद्यमियों की सुविधाओं का खयाल रखना होगा।

दो हिस्सों में बंटा शहर
सेक्टर-20 जाने के रास्ते में बना फ्लाईओवर और इसी तरह जीरकपुर के रास्ते में भी फ्लाईओवर की वजह से पंचकूला वासियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। इस पर नए सिरे से अध्ययन करने की जरूरत है, ताकि दो हिस्सों में शहर बंटने के कारण होने वाली परेशानियां कम हो सके। विकास की बात करें तो बदहाल सड़कें ही पंचकूला की दास्तां बयां करती हैं।

बातचीत में ये बातें छनकर सामने आईं

व्यापारियों से जब विधानसभा चुनाव से पहले इन कमियों को कुरेदा गया तो बातें छन छनकर सामने आईं। केमिस्ट एसोसिएशन, पंचकूला के संरक्षक बीबी सिंघल के मुताबिक यूनिवर्सिटी के नहीं होने की वजह से बच्चों को पढ़ाई के लिए घर छोड़ना पड़ता है।

आईटी पार्क बनाने के दावे किए गए, लेकिन एक भी कंपनी की शुरुआत नहीं हुई है। इसलिए रोजगार के लिए युवा भी बाहर का रुख कर रहे हैं।

ज्वैलर्स एसोसिएशन, पंचकूला के दीप कृष्ण चौहान के मुताबिक एमडीसी में हुई लूट के बाद भी ज्वेलर्स की सुरक्षा के लिए न तो सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और न ही पुलिस की चौकसी बढ़ी है।

निजी सुरक्षा के लिए भी आर्म्स के लिए आवेदन करने वालों को दोबारा इसके लिए आवेदन करने को कहा गया, जिससे व्यापारियों की चिंता बनी हुई हैं।

चंडीगढ़ के बिना पंचकूला कुछ भी नहीं

न रोजगार है। न उच्च शिक्षा के लिए कोई यूनिवर्सिटी है। न इलाज के लिए बेहतर अस्पताल हैं। इन सबके लिए पंचकूला के लोग चंडीगढ़ पर निर्भर हैं।

अगर चंडीगढ़ न हो तो पंचकूला तो बस गांव है। शहर के विकास के वायदे तो खूब हुए मगर उन पर काम नहीं हुआ। यह पीड़ा है पंचकूला के व्यापारियों और उद्यमियों की।

शनिवार को अमर उजाला के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में व्यापार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने बताया कि किस तरह लंबे समय से पंचकूला के हितों से खिलवाड़ होती रही है।
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पंचकूला की अनदेखी कर रहा यूटी प्रशासन

ट्राइसिटी में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला शामिल हैं, लेकिन विसंगतियां और स्थानीय प्रशासन और सरकार की अनदेखी से पंचकूला के विकास की रफ्तार प्रदेश के अन्य दोनों शहरों से काफी पीछे है।

सुरक्षा, कौशल्या डैम पर करोड़ों खर्च के बावजूद स्वच्छ पानी को तरसते पंचकूला वासी,  यूनिवर्सिटी, ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, सड़क, लावारिस पशु, टैक्स विसंगतियां, कनवर्जन पॉलिसी, औद्योगिक इकाईयों पर बढ़ते बोझ से पलायन का खतरा, रोजगार में कमी के साथ सिंगल विंडो सिस्टम के नहीं होने का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं।

नीतियों में कमियां हो या विभागीय सामंजस्य का आभाव और एक दूसरे पर जिम्मेवारी थोपे जाने की वजह स्थानीय लोगों की समस्या जस के तस बनी हुई हैं। प्रदेश के गठन के कई वर्ष बाद भी ट्राइसिटी को जोड़ने के लिए माकूल ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम तक मुहैया नहीं हो सका है।
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