ट्राइसिटी में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला शामिल हैं, लेकिन विसंगतियां और स्थानीय प्रशासन और सरकार की अनदेखी से पंचकूला के विकास की रफ्तार प्रदेश के अन्य दोनों शहरों से काफी पीछे है।
सुरक्षा, कौशल्या डैम पर करोड़ों खर्च के बावजूद स्वच्छ पानी को तरसते पंचकूला वासी, यूनिवर्सिटी, ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, सड़क, लावारिस पशु, टैक्स विसंगतियां, कनवर्जन पॉलिसी, औद्योगिक इकाईयों पर बढ़ते बोझ से पलायन का खतरा, रोजगार में कमी के साथ सिंगल विंडो सिस्टम के नहीं होने का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं।
नीतियों में कमियां हो या विभागीय सामंजस्य का आभाव और एक दूसरे पर जिम्मेवारी थोपे जाने की वजह स्थानीय लोगों की समस्या जस के तस बनी हुई हैं। प्रदेश के गठन के कई वर्ष बाद भी ट्राइसिटी को जोड़ने के लिए माकूल ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम तक मुहैया नहीं हो सका है।
बातचीत में ये बातें छनकर सामने आईं
व्यापारियों से जब विधानसभा चुनाव से पहले इन कमियों को कुरेदा गया तो बातें छन छनकर सामने आईं। केमिस्ट एसोसिएशन, पंचकूला के संरक्षक बीबी सिंघल के मुताबिक यूनिवर्सिटी के नहीं होने की वजह से बच्चों को पढ़ाई के लिए घर छोड़ना पड़ता है।
आईटी पार्क बनाने के दावे किए गए, लेकिन एक भी कंपनी की शुरुआत नहीं हुई है। इसलिए रोजगार के लिए युवा भी बाहर का रुख कर रहे हैं।
ज्वैलर्स एसोसिएशन, पंचकूला के दीप कृष्ण चौहान के मुताबिक एमडीसी में हुई लूट के बाद भी ज्वेलर्स की सुरक्षा के लिए न तो सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और न ही पुलिस की चौकसी बढ़ी है।
निजी सुरक्षा के लिए भी आर्म्स के लिए आवेदन करने वालों को दोबारा इसके लिए आवेदन करने को कहा गया, जिससे व्यापारियों की चिंता बनी हुई हैं।
चंडीगढ़ के बिना पंचकूला कुछ भी नहीं
न रोजगार है। न उच्च शिक्षा के लिए कोई यूनिवर्सिटी है। न इलाज के लिए बेहतर अस्पताल हैं। इन सबके लिए पंचकूला के लोग चंडीगढ़ पर निर्भर हैं।
अगर चंडीगढ़ न हो तो पंचकूला तो बस गांव है। शहर के विकास के वायदे तो खूब हुए मगर उन पर काम नहीं हुआ। यह पीड़ा है पंचकूला के व्यापारियों और उद्यमियों की।
शनिवार को अमर उजाला के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में व्यापार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने बताया कि किस तरह लंबे समय से पंचकूला के हितों से खिलवाड़ होती रही है।