मनीमाजरा। पीपली वाला टाउन में माता बनभौरी मंदिर में गुप्त नवरात्रों के अवसर पर आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के सातवें दिन भी जारी रही। इस अवसर पर कथावाचक रमनीक कृष्ण महाराज ने मणिद्वीप का वर्णन करते हुए कहा कि व्यासजी कहते हैं कि ब्रह्म लोक से ऊपर के भाग में सर्वलोक सुना जाता है। वहीं मणिद्वीप है, जहां मां भगवती जगदंबा विराजती हैं। संपूर्ण लोक से श्रेष्ठ होने के कारण इसका सर्वलोक यह नाम पड़ा है। इसके समान त्रिलोकी में कहीं कोई भी सुंदर धाम नहीं हैं।
जगत के लिए यह छत्र स्वरूप है। वहां सांसारिक ताप अपना प्रभाव नहीं जमा सकता। सभी ब्रह्मांड उसी की छत्र छाया में है। उस मणि द्वीप के चारों ओर अनेक योजन दीर्घ ओर विस्तार से सम्पन्न अमृत का समुद्र विराजमान है। पवन के झोंक से उठी हुई शत शत तरंगें उसकी शोभा बढ़ाती रहतीं है। रत्नमय बालुका, मत्स्य ओर शंख से वह भरा है। इस सुधामय समुद्र के चारों ओर तट पर रत्नमय वृक्ष शोभा प रहे हैं। इस समुद्र के बाद लौहमय धातु की बनी हुई, गगनचुंबी चारदीवारी है। उसका विस्तार सात योजन है। यहां सर्वत्र आनंद का ही साम्राज्य रहता है। इस परकोटे में चार द्वार है। इस चारदीवारी के भीतर देवी में भक्ति रखने वाले अनेक गण रहते है। भगवती जगदंबा दर्शन करने के लिए जो देवता लोग आते है, उनके गणों के रहने के लिए यहां स्थान बने है। वहीं कथा में विशेष तौर पर सुरजीत सिंह राजा प्रधान (शिरोमणि अकाली दल) और ऑल मनीमाजरा वेलफेयर एसोसिएशन के एसएस परवाना, गुरप्रीत सिंह चंडीगढ़, सतनाम सिंह, दिलबाग सिंह और सुशील काजल पहुंचे थे।