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'मुख्यमंत्री को किसी से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं'

Tue, 17 Jun 2014 10:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब में अकाली-भाजपा रिश्तों में आई खटास कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के पंजाब भाजपा नेताओं को साथ लिए बगैर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मिलने पर प्रदेश भाजपा द्वारा उठाए गए सवालों पर सोमवार को शिअद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
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यहां जारी एक बयान में शिअद महासचिव महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री को मिलना केवल मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का अधिकार क्षेत्र है और इसके लिए उन्हें किसी से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं।

भाजपा नेता बलरामजी दास टंडन की ओर से इस संबंध में की गई बयानबाजी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ग्रेवाल ने कहा कि कोई भी यह निर्धारित नहीं कर सकता कि मुख्यमंत्री तथा उप मुख्यमंत्री कब व कैसे प्रधानमंत्री से मिलेंगे।
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उनकी प्रधानमंत्री के साथ मुलाकातें निरंतर चलती रहने वाली प्रक्रिया है। जब भी जरूरत पड़ेगी सीएम और डिप्टी सीएम प्रधानमंत्री से बिना किसी की सलाह व मंजूरी से मिलते रहेंगे।

गठबंधन की कुछ मर्यादाएं होती हैं

ग्रेवाल ने यह भी कहा कि शिअद के अपने सिद्धांत और विभिन्न मसलों पर अपनी राय है, जिससे वह किसी भी कीमत पर समझौता नहीं कर सकता। साथ ही कहा कि गठबंधन की कुछ मर्यादाएं होती हैं। अगर सहयोगी दलों में कोई मतभेद है, तो उसे आपसी बातचीत से सुलझाना चाहिए, न कि सार्वजनिक बयानबाजी करके।

उन्होंने आगे कहा कि दस साल बाद केंद्र में एनडीए सरकार बनी है, इसलिए टंडन जैसे वरिष्ठ नेताओं को नरेंद्र मोदी के हाथ मजबूत करने की दिशा में बयानबाजी करनी चाहिए, न कि कमजोर करने के लिए। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य केंद्रीय मंत्रियों से की गई बैठकों में प्रदेश भाजपा नेताओं को साथ न रखने पर सवाल उठे थे।

पार्टी की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मंत्री बलराम सिंह दास टंडन ने कहा था कि ड्रग्स, खनन, दरियाई पानी, आर्थिक संकट आदि प्रदेश के ऐसे मसले हैं, जिन पर गठबंधन सरकार के दोनों सहयोगी चिंतित हैं। इसलिए अच्छा होता यदि शिअद नेता, पंजाब भाजपा मंत्रियों व पदाधिकारियों को भी इस तरह के महत्वपूर्ण मौकों पर साथ रखते।

मंजूरी नहीं, सलाह के लिए कहा : टंडन

इस बारे में बलरामजी दास टंडन ने कहा कि उन्होंने तो पंजाब के विभिन्न मसलों पर सहयोगी पार्टी से परामर्श लेने की सलाह दी थी। उन्होेंने यह नहीं कहा कि मुख्यमंत्री, भाजपा नेताओं से इजाजत लें। टंडन ने फिर दोहराया कि यदि मुख्यमंत्री अपने साथ भाजपा नेताओं को भी ले जाते तो इसका अच्छा संदेश जाता।

मसले पर भाजपा की बैठक जल्द

लोकसभा चुनाव में अमृतसर से अरुण जेटली की हार के बाद विभिन्न मुद्दों पर अकाली-भाजपा रिश्तों में आई खटास के बीच प्रधानमंत्री से बादल व सुखबीर की मुलाकात के मसले पर उठे बवाल पर विचार-विमर्श के लिए जल्द ही पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक होने जा रही है।

जानकारी के अनुसार इस बैठक में प्रदेशाध्यक्ष कमल शर्मा सहित बलरामजीदास टंडन, तीक्ष्ण सूद, अनिल जोशी, तरूण चुघ आदि नेता शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार प्रदेश भाजपा नेताओं ने लोकसभा चुनाव के बाद जो रवैया अख्तियार किया है, वह उससे जल्द पीछे हटने वाले नहंीं हैं। वह चाहते हैं कि भाजपा कोटे के विभागों में अकालियों की दखलंदाजी बंद हो और केंद्र सरकार से इनसे संबंधित विचार-विमर्श के दौरान उन्हें साथ रखा जाए। आगामी 24 मई को शांता कुमार के साथ प्रदेश भाजपा नेताओं की होने वाली बैठक में भी इस संबंध में खुलकर बातचीत होगी।
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मंत्रियों के बदलाव पर असमंजस

पंजाब कैबिनेट में शामिल भाजपा मंत्रियों में बदलाव तो संभावित है, लेकिन किसे हटाया जाए और किसे मंत्री बनाया जाए, इस पर पार्टी असमंजस में है।

इस वक्त केबिनेट में चूनी लाल भगत, मदन मोहन मित्तल, सुरजीत कुमार ज्याणी और अनिल जोशी शामिल हैं। यदि लोकसभा चुनाव के परिणामों को आधार माना जाए तो मित्तल व ज्याणी के विधानसभा हलकों में गठबंधन उम्मीदवार जीते थे, जबकि भगत व जोशी के हलकों में हारे थे। यदि इस आधार पर फेरबदल होता है तो फिर भगत की जगह कौन सा दलित चेहरा केबिनेट में होगा, यह बड़ा सवाल है। वहीं, जोशी की अरुण जेटली से काफी नजदीकियां हैं। ऐेसे में बदलाव काफी जटिल स्थिति में उलझा हुआ है।
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