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आज भी हरे हैं केदारनाथ जलप्रलय के ‘घाव’

Mon, 16 Jun 2014 05:16 PM IST
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, पंचकूला
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पिछले साल चार धाम की यात्रा पर निकले 30 लोगों को मालूम नहीं था कि वह कब, कहां और किस हाल में रहेंगे। ईश्वर की यह कृपा ही रही कि ये परिवार सुरक्षित घर लौट आए, लेकिन जलप्रलय ने जो कहर बरपाया, उसका जख्म आज तक हरा-भरा है।
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यदि भगवान की कृपा रही तो ये परिवार अगली बार बाकी बची बद्रीनाथ यात्रा पर भी जाएंगे। भारतीय योग संस्थान से जुड़े लोग पिछले साल जून के दूसरे सप्ताह में पंचकूला से रवाना हुए थे। यह दल सबसे पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री और इसके बाद केदारनाथ पहुंचा।

सेक्टर-20 के जीएच-28 में रहने वाले केडी पाठक ने बताया कि केदारनाथ में जिस रात यह हादसा हुआ, उससे करीब छह-सात घंटे पहले सभी बद्रीनाथ के लिए रवाना हो चुके थे। खराब मौसम और ऊपरी हिस्से में रास्ता टूटा देखकर सभी ने गोविंदघाट के एक होटल में रुकने का मन बनाया, लेकिन जगह कम होने की वजह से वहां ठहरने का मौका नहीं मिला। थोड़ी देर बाद गोविंदघाट और बद्रीनाथ के बीच का रास्ता भी टूट गया और सभी लोगों को बस में ही पूरी रात बितानी पड़ी।
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जहां ठहरना चाहते थे वो पानी में बह गया

इसके बाद लौटते हुए जब कर्णप्रयाग के पास एक स्कूल में रात बिताने का मन बनाया, तो स्थानीय लोगों ने मना कर दिया। इसके बाद सभी लोग रात के वक्त फिर बस में ही सो गए और सुबह उठकर देखा तो स्कूल भी पानी के बहाव में बह चुका था।

यहां से आगे बढ़ा तो हालात और खराब थे। एक जगह कच्चा रास्ता बनाया गया, जिससे लोगों को पैदल निकाला गया, जबकि बस पीछे-पीछे आई। इस बस के गुजरते ही एक बड़ा चट्टान वहां गिरा, जिसके साथ सब कुछ सैकड़ों फुट की गहराई में जा गिरा।

उन्होंने कहा कि इस ग्रुप में शाम लाल गर्ग, बीडी शर्मा और उनकी पत्नी ऊषा शर्मा सहित कई लोग शामिल थे, लेकिन इस आपदा को ताउम्र भुलाना मुश्किल है।
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बस ड्राइवर की जिद ने बचाई जान

सभी लोग मिनी बस में गए थे और सुरक्षित लौट आए, लेकिन जिंदगी की जद्दोजहद कम नहीं थी। दो रातें बस में गुजारीं। पता नहीं था कि यहां भी सुरक्षित रहेंगे या नहीं।

एक दिन गंदे पानी से बनी खिचड़ी खाई। ठहरने और वापस लौटने के रास्ते के मसले पर बस ड्राइवर के साथ कई बार कहासुनी भी हुई, लेकिन उसकी जिद ने ही इन 30 यात्रियों को सुरक्षित घर पहुंचाया। उत्तराखंड निवासी होने की वजह से उसे सभी रास्तों के बारे में पूरी जानकारी थी और वह अपनी समझ से ही बाधाओं को पार करता चला गया।
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