सात साल के आशू को पता नहीं था कि 4 घंटे के भीतर ही उसके सिर से मां और बाप का दोनों का साया उठ जाएगा। वीरवार को सुबह पीजीआई में इलाज के दौरान आशू की मां की मौत हो गई।
इसी गम में उसके पिता ने कुछ देर बाद ही रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी। बच्चे को सेक्टर-19 की चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी में भिजवा दिया गया है।
राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को वीरवार सुबह करीब 10.15 बजे ट्रेन से किसी के कटने की सूचना मिली। व्यक्ति की पहचान लुधियाना निवासी 42 वर्षीय अश्वनी के रूप में हुई।
पत्नी की मौत के गम को सह नही पाया अश्वनी
अश्वनी के बेटे आशू ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उसकी मां ज्योति का पीजीआई में इलाज चल रहा था। सुबह करीब 6 बजे उसकी मां की मौत हो गई।
इसी गम में अश्वनी अपने बेटे आशू को लेकर चंडीगढ़ स्टेशन से करीब ढाई किलोमीटर दूर (अंबाला की तरफ) रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया। सुबह करीब 10 बजे जब ट्रेन आई तो अश्वनी ने बेटे को दूर जाने को कहा और खुद ट्रेन के आगे कूद गया।
जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सेक्टर-6 पंचकूला के सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में रखवा दिया। वहीं आशू की मां का शव अभी भी पीजीआई की मॉर्चरी में ही पड़ा है।
रिश्तेदारों से कोई संपर्क नहीं था दंपति का
पुलिस ने अश्वनी के मोबाइल से नंबर लेकर आशू के मामा को फोन किया। आशू के मामा महाराष्ट्र के किसी गांव में रहते हैं, जिन्होंने कहा कि वह दो दिन बाद चंडीगढ़ पहुंचेंगे।
आशू के मामा ने बताया कि वह सिर्फ अपनी बहन (आशू की मां) को ही जानते थे जबकि अश्वनी से उसका किसी तरह का कोई संपर्क नहीं था। जीआरपी ने लुधियाना पुलिस से भी संपर्क किया और वहां से भी यही जानकारी मिली कि अश्वनी और उसका परिवार किसी से बातचीत नहीं करता था और न ही मिलता-जुलता था।
वे लोग लुधियाना के न्यू सुभाष नगर में रहते थे। अश्वनी लुधियाना में किसी कपड़े के कारखाने में काम करता था।