फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदली तस्वीर: ओलंपिक में सफलता से खेल केंद्रों में बढ़े बच्चे... अब नई सोच-खेलोगे तो देश का नाम रोशन करोगे

Tue, 17 Aug 2021 02:04 PM IST
निवेदिता वर्मा संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम के कोच नसीम अहमद की निगरानी में जैवलिन थ्रो की बारीकियां सीखी थीं। कोच नसीम अहमद ने बताया कि अब रोजाना 10 से 15 अभिभावक उनके पास आ रहे हैं, जो अपने बच्चों को जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) सिखाना चाहते हैं।
विज्ञापन
जैवलिन थ्रो की प्रेक्टिस करता बच्चा। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पुरानी कहावत है कि पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब, लेकिन टोक्यो ओलंपिक के बाद इस कहावत के प्रति लोगों का नजरिया बदल गया है। ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बाद ट्राइसिटी के अभिभावकों का रुझान खेलों की ओर बढ़ा है।

विज्ञापन


शहर की स्पोर्ट्स अकादमियों में रोजाना कई अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने पहुंच रहे हैं। उनकी दिली ख्वाहिश है कि उनका बच्चा भी एक दिन नीरज चोपड़ा व बजरंग पूनिया का तरह देश का नाम रोशन करे। खेल अकादमी से जुड़े कोचों ने बताया कि इस बार के ओलंपिक में पदक जीतने वालों की खास बात यह है कि अधिकतर खिलाड़ी वे हैं, जो बहुत ही कम उम्र में मैदान पर पहुंच गए थे। नीरज चोपड़ा ने 13 साल की उम्र में ही जैवलिन थ्रो की शुरुआत कर दी थी। कुश्ती में रजत पदक जीतने वाले रवि दहिया महज दस साल की उम्र में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कुश्ती के दाव-पेंच सीखने पहुंच गए थे। इन कहानियों ने अभिभावकों को बहुत प्रेरित किया है। इसी वजह से अब वे अपने बच्चों को कम उम्र में ही खेलों से जोड़ना चाहते हैं।    

बच्चों को जैवलिन थ्रो सिखाने के लिए स्टेडियम पहुंच रहे अभिभावक 

ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम के कोच नसीम अहमद की निगरानी में जैवलिन थ्रो की बारीकियां सीखी थीं। कोच नसीम अहमद ने बताया कि अब रोजाना 10 से 15 अभिभावक उनके पास आ रहे हैं, जो अपने बच्चों को जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) सिखाना चाहते हैं। हर अभिभावक अपने बच्चे में नीरज चोपड़ा की झलक देख रहा है। इतने वर्षों में यह पहली बार है, जब बच्चे व युवा जैवलिन थ्रो सीखना चाहते हैं। ताऊ देवी लाल स्टेडियम में जैवलिन थ्रो की अकादमी है। यहां पर दाखिला लेने के लिए कोई फीस नहीं ली जाती। कोचिंग भी निशुल्क दी जाती है।

कुश्ती के लिए भी जुट रही युवाओं की भीड़
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पहलवानों का जलवा और उनके संघर्ष की कहानी ने युवाओं को काफी प्रेरित किया है। मनीमाजरा स्थित रेसलिंग के मुख्य कोच दर्शन लाल ने बताया कि ओलंपिक में रेसलिंग में पदक आने पर उनके पास रोजाना दस से ज्यादा किशोर खेल से जुड़ने के लिए पहुंच रहे हैं। कई अभिभावक भी बच्चों के साथ आ रहे हैं। हर कोई पहलवानों के खेल से उत्साहित है। मनीमाजरा में कुश्ती का सबसे बड़ा सेंटर है। यहां की फीस सालाना 200 रुपये है।
विज्ञापन

मुक्केबाजी का भी बढ़ा क्रेज

सेक्टर-56 में मुक्केबाजी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थित है। यहां पर नेशनल व स्टेट लेवल की ट्रेनिंग दी जाती है। सेंटर के प्रमुख कोच भगवंत सिंह ने बताया कि टोक्यो ओलंपिक में मेडल जीतने पर शहर से कई अभिभावकों अपने बच्चे-बच्चियों को मुक्केबाज बनाने में रुचि बढ़ी है। कई ने एडमिशन भी ले लिया है। बहुत दिनों में इस तरह का जोश देखने को मिल रहा है।

क्या कहते हैं अभिभावक
टोक्यो ओलंपिक शुरू होने से पहले मैरीकॉम का इंटरव्यू देखा था। इससे मेरे साथ मेरा 16 वर्षीय बेटा भी काफी प्रभावित हुआ। फिर जब ओलंपिक में लवलीना ने कांस्य पदक जीता तो बेटे ने तय कर लिया कि वह मुक्केबाज बनेगा। उसकी जिद के चलते मुक्केबाजी की किट दिलाई। अब सेक्टर-56 स्थित मुक्केबाजी सेंटर में कोच भगंवत सिंह से मिलकर उसका दाखिला करा दिया है। -प्रवीण भाटिया, सेक्टर-110, मोहाली

नीरज चोपड़ा की जीत के बाद मेरा बेटा वंश जोश से भरा हुआ है। वह अभी 13 वर्ष का है और नीरज भी 13 साल की उम्र में जैवलिन थ्रो की ट्रेनिंग लेने पहुंचे थे। वंश को मैं पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में लेकर गया था। वहां पर नीरज के कोच नसीम अहमद से मुलाकात की और जैवलिन थ्रो सिखाने का आग्रह किया। अब बेटे का दाखिला हो गया है और अब वह ट्रेनिंग ले रहा है। -रविंदर पंघाल, सेक्टर-16, पंचकूला

टोक्यो ओलंपिक के दौरान कुश्ती में रवि दहिया व बजरंग पूनिया के खेल से मेरा बेटा काफी प्रभावित हुआ। उसके जिद करने पर उसे चंडीगढ़ खेल विभाग के मनीमाजरा स्थित कुश्ती के सेंटर में दाखिला दिलवा दिया है। -अर्जुन सिंह, मनीमाजरा
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें