प्रदेश नेतृत्व से लेकर कांग्रेस हाईकमान इस बार विधानसभा चुनाव को लेकर काफी संजीदा हैं, इसलिए पार्टी की बठिंडा रैली के बाद सभी विधानसभा हलकों में सर्वे कराया जाएगा।
ताकि विनेबल कैंडिडेट की तलाश हो सके। वहीं, इस बार टिकट वितरण भी जल्द किया जाएगा। बिहार की तर्ज पर पंजाब में महागठबंधन पर भी पार्टी जल्द फैसला लेने की कोशिश में है।
प्रदेश प्रभारी शकील अहमद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हाईकमान जल्द ही प्रदेश प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह से महागबंठन के बारे में बातचीत करेगा। 15 दिसंबर की बठिंडा रैली के बाद इसकी रूपरेखा तैयार की जाएगी। गठबंधन में बसपा के शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर भी बातचीत होगी।
शकील ने कहा कि बठिंडा रैली के बाद हाईकमान अपने स्तर पर सभी 117 विधानसभा हलकों में सर्वे कराएगा। ताकि समय रहते ही चुनाव में विनेबल कैंडिडेट की पहचान हो सके। इस सर्वे में स्थानीय नेताओं का कोई रोल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश प्रधान और हाईकमान की यह कोशिश है कि समय रहते हुए टिकट वितरण कर दिया जाए।
पूर्व प्रधान प्रताप बाजवा और पूर्व सीएम रजिंदर कौर भट्ठल के करीबियों को टिकट देने के सवाल पर शकील ने कहा कि इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी। पार्टी में कैंडिडेट चुनने की व्यवस्था है।
जिलों से उम्मीदवारों के पैनल मंगवाए जाते हैं। पीपीसीसी उसे स्क्रीनिंग कमेटी के पास भेजती है। जहां से शॉर्टलिस्ट कर अंतिम पैनल हाईकमान को भेजा जाता है। बाजवा को नई जिम्मेदारी के सवाल पर शकील ने कहा कि वह प्रभावशाली नेता हैं, उनका पूरा ख्याल रखा जाएगा। बठिंडा रैली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के आने के सवाल पर शकील ने कहा कि उन्हें नहीं पता है कि आयोजकों ने किसे आमंत्रित किया है।
शकील ने कहा कि चाणक्य ने कहा था कि जिस राज्य का राजा व्यापारी बन जाए, वहां की प्रजा भिखारी बन जाती है। पंजाब का यही हाल है। उन्होंने कहा कि जीएसटी कांग्रेस का मुद्दा है, पीएम नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इसका सबसे ज्यादा विरोध किया था, आज पैरवी कर रहे हैं। कांग्रेस हमेशा से इसके पक्ष में है, तीन प्रावधानों को बदलने की मांग की गई है। अब फैसला केंद्र सरकार को करना है।