पंजाब में इन स्त्रोतों से बढ़ा एयरोसोल प्रदूषण
अध्ययन में पाया गया है कि 2005 से 2009 तक पंजाब में एयरोसोल प्रदूषण के प्रमु्ख स्रोत वाहनों से उत्सर्जन, ठोस ईंधन जलने और थर्मल पावर प्लांट (टीपीपी) से निकलने वाले उत्सर्जन थे लेकिन 2010-2014 के बीच, पराली जलाने की घटनाएं एयरोसोल प्रदूषण का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बन गईं। 2015-2019 के दौरान पराली जलाने के कारण एयरोसोल प्रदूषण 34-35 फीसदी तक बढ़ गया। इसके बाद टीपीपी (20-25 प्रतिशत) और वाहनों से उत्सर्जन (17-18 प्रतिशत) तक योगदान दे रहे हैं।
पराली जलाना प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण
अध्ययन ने पंजाब के लिए बढ़ते एयरोसोल प्रदूषण को रोकने की कई सिफारिशें भी की गई हैं लेकिन इसके साथ ही मोनामी दत्ता का कहना है कि पराली जलाने के बजाय वैकल्पिक तरीके खोजना जरूरी है क्योंकि फसल अवशेष जलाना इस राज्य में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। डॉ. चटर्जी ने जोर देकर कहा है कि उनके अध्ययन ने राज्य सरकार और नीति निर्माताओं को फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए तत्काल कार्य योजना बनाना जरूरी है, जिसमें विफल रहने पर पंजाब के लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और गंभीर हो सकती है।
एओडी का मानक
एओडी की वैल्यू (मान) 0 और 1 है। 0 अधिकतम दृश्यता के साथ एक क्रिस्टल-क्लियर आकाश का संकेत देता है, जबकि 1 की वैल्यू बहुत धुंधली स्थितियों को इंगित करती है। एओडी मान 0.3 से कम ग्रीन जोन (सुरक्षित) के अंतर्गत आता है, 0.3-0.4 ब्लू जोन (कम असुरक्षित) है, 0.4-0.5 ऑरेंज (कमजोर) है जबकि 0.5 से अधिक रेड जोन (अत्यधिक असुरक्षित) है।