सड़क हादसे में बेटे की मौत के बाद मोगा के एडवोकेट चंद्रभान खेड़ा करीब 12 साल से झुग्गी झोपड़ी के बच्चों को शिक्षित करने में जुटे हैं। आजादी के समय पाकिस्तान से मोगा आकर बस गए खेड़ा का मानना है कि शिक्षा समाज का मुख्य आधार है। इसी के चलते उन्होंने शहर के उस वर्ग को शिक्षा प्रदान करना शुरू किया, जिसे समाज में रहते हुए समाज का हिस्सा नहीं माना जाता था।
रेलवे लाइन के आसपास झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों के बच्चों को एकत्रित कर पढ़ाने का दौर शुरू किया और आज उनके इस काम में अनेक समाजसेवी उन्हें वित्तीय सहयोग दे रहे हैं। प्रत्येक साल वह झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले करीब 200 से अधिक बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करते आ रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि 80 साल की उम्र में भी उनका जुनून किसी युवा से कम नहीं है।
बच्चों के माता-पिता की भी लगती है क्लास
खेड़ा के स्कूल में गरीब बच्चों के माता-पिता की भी कक्षा लगती है। बच्चे ही नहीं, अब तो उनके माता-पिता भी अपना नाम खुद अंग्रेजी में लिखना सीख लिया है। वकील चंद्रभान खेड़ा कुछ साल पहले झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली बच्चों की माताओं को भी सक्षर कर चुके हैं। इस दौरान उन्हें अपना नाम लिखने, साइन करने और अपना परिचय देना सिखा दिया है। खेड़ा का कहना है कि उनका मुख्य लक्ष्य इन गरीब और पिछड़े लोगों को मुख्य धारा में लाना है।
बेटे की मौत के बाद लिया संकल्प
एडवोकेट खेड़ा का कहना है कि बेटे अमित की मौत के बाद उन्होंने बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना शुरू किया। उन्होंने सहयोग के लिए एक अध्यापिका को भी रखा हुआ है। स्कूल में रोजाना इन बच्चों को रिफ्रेशमेंट भी दी जाती है। इसके साथ ही बच्चों के जन्मदिन मनाने के लिए झुग्गी झोपड़ी में जाकर बच्चों के डेट ऑफ बर्थ के फार्म भरे गए और अब वह हरेक बच्चे का बर्थडे स्कूल में केक काटकर मनाते हैं। इसके लिए शहर के समाजसेवी उन्हें स्कूल में ही सहयोग दे जाते हैं।
स्कूल को अपडेट करने पर लगा है जोर
स्कूल में इस समय दूसरी कक्षा तक बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। खेड़ा अपने इस स्कूल को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके स्कूल में पढ़े कई बच्चों के 80 फीसदी से अधिक अंक आ रहे हैं, जिन्हें सरकार द्वारा स्कॉलरशिप भी दी जाती है। दूसरी के बाद सीधा पांचवीं कक्षा में बच्चों को शहर के एडेड स्कूलों में दाखिल करवाने और पढ़ाई तक की पूरी जिम्मेदारी एडवोकेट खेड़ा की होती है। इसके अलावा कुछ योग्य बच्चों को शहर के निजी स्कूलों में भी पढ़ाया जा रहा है।