चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा को भारत सरकार की कैबिनेट अप्वाइंटमेंट कमेटी ने राष्ट्रीय प्राधिकरण रासायनिक हथियार समझौता का चेयरमैन नियुक्त किया है। गुरुवार को तबादले का आदेश आने के बाद परिदा सुखना लेक पहुंचे और वहां पर एक घंटा बिताया। परिदा सैर के लिए रोज सुखना लेक जाते हैं।
उनका कहना है कि वह सबसे ज्यादा सुखना को मिस करेंगे। परिदा का कहना है कि चंडीगढ़ ऐसा शहर है, जहां फैसला लेने के बाद जनता के सामने जाकर जवाब भी देना पड़ता है। हर फैसले पर प्रतिक्रिया मिलती है और उसके अच्छे व बुरे पहलुओं पर अच्छी खासी बहस भी होती है। यह किसी भी शहर के लिए अच्छी बात है। विदाई से पहले उन्होंने अमर उजाला के साथ कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की।
सवाल : चंडीगढ़ में काम करने का अनुभव कैसा रहा?
जवाब : बिल्कुल अलग। एक व्यवस्थित शहर होने के साथ-साथ मैंने महसूस किया है कि चंडीगढ़ एक पॉजीटिव शहर भी है। यहां पर काम करने की आजादी है। राजनीतिक दखल न के बराबर है। प्रशासन में अलग-अलग कैडर के अधिकारियों के साथ काम करने का मौका मिला। ढाई साल वक्त यहां काफी अच्छा रहा। सुखना लेक, जहां मैं लगभग रोज जाता हूं, उसे बहुत मिस करूंगा। चंडीगढ़ में काम करने का तरीका भी अलग है। यहां गरीबों के साथ अमीरों की भी अपनी समस्याएं हैं। यह ऐसा शहर है, जहां कोई भी फैसला लेने के बाद जनता को भी जवाब देना पड़ता है।
आपके हिसाब से आपकी क्या उपलब्धियां रही हैं?
जवाब: कोरोना काल में 1700 परिवारों को पक्का घर दिया। करीब 1200 करोड़ रुपये की जमीन खाली करवाई, जहां एक अच्छा अस्पताल, कॉलेज या कुछ भी बनाया जा सकता है। कोविड मैनेजमेंट में अच्छा काम किया, जिसकी प्रधानमंत्री ने भी तारीफ की। शहर में फॉरेस्ट कवर बढ़ा। वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर कई प्रोजेक्ट शुरू किए। स्मार्ट सिटी के तहत बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट शुरू कराया। शिक्षा की हर रैंकिंग में अव्वल रहे। मेडिकल कॉलेज में 50 सीटें बढ़ाईं। पीजीआई को अतिरिक्त जगह दिलाई। जेपी के अनुबंध को तोड़ कचरा निस्तारण प्लांट को अपने अधीन लिया और अब वहां जल्द काम शुरू होने वाला है।
सवाल : कोरोना के मैनेजमेंट को लेकर कई बार सवाल भी उठे, आपका क्या कहना है?
जवाब: चंडीगढ़ में कोरोना मृत्यु के आंकड़े बेहद कम हैं। बाकी राज्यों जैसी स्थिति नहीं बनने दी। अगर स्थिति खराब होती तो क्या राजनीतिक पार्टियां हमें जीने देतीं। दूसरी लहर में जब ऑक्सीजन की मारामारी थी तो हमने पूरी सप्लाई चेन बनाई। बेड और दवाइयों से लेकर हर चीज की एक योजना बनाकर काम किया। मिनी कोविड केयर सेंटर, वैक्सीनेशन, सर्विलांस आदि को लेकर कई प्रयोग किए गए।
सवाल: तारीफ के साथ शहरवासियों की कई बार नाराजगी भी झेलनी पड़ी, क्यों?
जवाब: यहां लोग बहुत समझदार हैं। अगर प्रशासन उनसे सुखना लेक पर जाने से मना करता है तो वे उसे मानते हैं, लेकिन अगर कहीं उन्हें गलत लगता है तो वह कोर्ट जाने से भी नहीं कतराते। फैसला गलत लगता है तो बहस करते हैं। शहर के विषयों को लेकर व्यापारी, समाजसेवी, उद्योगपति आदि सभी बहुत ज्यादा सक्रिय हैं। विदेशों के बाद ऐसा मैंने सिर्फ चंडीगढ़ में देखा है।
सवाल: जाते-जाते किसी बात का खेद?
जवाब: कोरोना की वजह से विकास के कुछ कार्यों को हम पूरा नहीं कर पाए, इसका मुझे खेद है। यदि कोरोना वायरस नहीं आता तो शहर को बहुत कुछ देकर जाता।