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Chandigarh News: श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे से मांगी क्षमा

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चंडीगढ़। पर्युषण महापर्व का समापन मैत्री दिवस के रूप में आयोजित होता है, जिसे क्षमापना दिवस भी कहा जाता है। ये शब्द मुनि विनय आलोक ने पर्युषण महापर्व के समापन के अवसर पर आयोजित क्षमापना दिवस को संबोधित करते हुए अणुव्रत भवन सेक्टर -24 सी के तुलसी सभागार में कहे।
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29 अगस्त समापन के दिन को संवत्सरी कहा जाता है। जैन धर्म का यह सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। पूरे आठ दिनों तक चले पर्युषण पर्व के समापन पर संवत्सरी आती है, जिसे आत्मशुद्धि, आत्ममंथन और क्षमा याचना का दिन माना जाता है। इस दिन जैन समाज के लोग उपवास, तप, ध्यान और स्वाध्याय करते हैं। एक-दूसरे से और अन्य लोगों से हुई भूल-चूक के लिए हृदय से क्षमा मांगते हैं। इस अवसर पर अणुव्रत समिति के प्रधान मनोज जैन, चंडीगढ़ तेरापंथ सभा के अध्यक्ष वेद प्रकाश, सुधीर जैन, प्रदीप जैन, रवि चोपड़ा, बलटाना से मनोज जैन, इसके अलावा महिला मंडल से शांता चोपड़ा, सरिता बोथरा, मंजू जैन, बबिता जैन, डॉक्टर सोनिया, सलिल जैन, विजय गोयल, ने अपने विचार रखे।
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