इनेलो नेता ने बताया कि विधानसभा की बैठक समाप्त होने के बाद मैंने स्वयं 6 नवम्बर को अम्बाला शहर एवं करनाल की मंडी में जाकर धान की खरीद के बारे में जायजा लिया। जिस पर किसानों ने बताते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि पहले तो सरकार ने 21 अक्तूबर, 2019 से खरीद ही बंद कर रखी है और जो खरीद की है उसमें नमी के नाम से किसान से अनुचित कटौती की जा रही है।
उन्होंने बताया कि सबूत के तौर पर किसानों द्वारा दिए गए जे-फार्मों की प्रतियां पत्र के साथ संलग्न कर दी हैं जिसमें एक में से 19,020 रुपए और दूसरे में से 28,545 रुपए नमी की आड़ में काट कर जे-फार्म में पूरा न्यूनतम समर्थन मूल्य दिखाया गया है। इनेलो नेता ने पत्र में लिखा है कि इस बार सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद किए गए धान की किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवाई जानी चाहिए।
मंडियों में फसल बिक्री की समीक्षा करेगी सरकार
हरियाणा की अनाज मंडियों में फसल बिक्री के क्या हालात रहे, किसानों की फसल पूरे दाम पर बिकी या नहीं व किसानों को फसल बेचने में किस प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, आदि मामलों की सरकार समीक्षा करेगी। मंत्रिमंडल गठन के बाद सरकार इस दिशा में काम करने जा रही है। दरअसल, इस मुद्दे पर विरोधियों की घेराबंदी के प्रयासों के चलते सरकार पूरी तरह गंभीरता दिखाना चाहती है।
नई गठबंधन सरकार बनते ही पहली विधानसभा सत्र में विपक्ष ने इसी मसले पर सरकार पर निशाना साधा था। कांग्रेस और इनेलो विधायकों का आरोप था कि किसानों को मंडियों में अपनी फसल बेचने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धान बिक्री में नमी के नाम पर उनकी राशि काटी जा रही है, तो सरसों व अन्य फसलों की बिक्री भी आसान नहीं है।
विपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा था कि सरसों की फसल पर तो कैप यानी फसल खरीद सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी फसल बाहर औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है। सरकार ने सदन में विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। इसी के चलते अब सरकार अपने स्तर पर भी मंडियों में फसल बिक्री की समीक्षा करेगी, ताकि किसानों से जुड़ी तमाम समस्याओं यदि कोई हैं, तो उसे भी तुरंत खत्म किया जा सके। सरकार इस बार मंडियों में बिक्री की स्थिति भी देखना चाहती है। इसी को लेकर सभी जिलों की तमाम मंडियों की कंपाइल रिपोर्ट तलब की गई है। सरकार यह भी देखना चाहती है कि फसलों का कुल उत्पादन कितना हुआ और मंडियों में बिक्री कितनी हुई।