कांग्रेस, शिअद-भाजपा और आप के मुकाबले चौथे फ्रंट की इबारत लिखने में जुटे सांसद डॉ. धरमवीर गांधी की अपनी भूमिका को लेकर असमंजस बन गया है। हालांकि, डॉ. गांधी और सुच्चा सिंह छोटेपुर गुट के बीच बातचीत फाइनल हो चुकी है। लेकिन, डॉ. गांधी की भूमिका को लेकर मंथन जारी है।
आम आदमी पार्टी ने डॉ. गांधी को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन अभी तक उन्हें पार्टी से निकाला नहीं गया है। तकनीकी पहलू यह है कि डॉ. गांधी न तो किसी और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ले सकते हैं। न ही लोक सभा में पार्टी की व्हिप का उल्लंघन कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में आप उनकी शिकायत करेगी और उनकी संसद सदस्यता जा सकती है, लेकिन वह किसी भी मंच से आप के खिलाफ भड़ास निकाल सकते हैं।
ऐसी स्थिति में पार्टी के पास सिर्फ उन्हें निकालने का विकल्प है, जो वह करेगी नहीं। डॉ. गांधी भी यही चाहते हैं कि पार्टी उन्हें निकाले। उस स्थिति में उनकी संसद सदस्यता भी बरकरार रहेगी और वह दूसरी पार्टी भी खुल कर ज्वाइन कर सकेंगे। आप के पूर्व सूबा कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर ने भी माना कि इस स्थिति पर मंथन किया जा रहा है।
माना जा रहा है कि डॉ. गांधी, छोटेपुर की पार्टी फिलहाल ज्वाइन नहीं करेंगे, लेकिन वह उन्हीं के मंच से आप के खिलाफ बोलेंगे। वहीं, चौथे फ्रंट के बैनर तले सभी को एकजुट करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन नवजोत सिद्धू के आवाज-ए-पंजाब फोरम ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
सिद्धू ने यह तो एलान कर दिया कि वह नई पार्टी नहीं बनाएंगे ताकि वोटों के बंटवारे से शिअद को फायदा न हो जाए। उन्होंने गठबंधन का विकल्प रखा है, पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किसके साथ जाएंगे। वोटों का बंटवारा न होने देने के उनके बयान से यह भी संकेत मिला है कि वह आप का साथ दे सकते हैं। वहीं, छोटेपुर गुट दावा कर रहा है कि आवाज-ए-पंजाब के नेताओं से उनकी बातचीत हो चुकी है। वे सभी साथ आने को सहमत हैं।
आवाज-ए-पंजाब ने खुले रखे सारे विकल्प
आवाज-ए-पंजाब के सदस्य और आजाद विधायक सिमरजीत बैंस ने कहा कि सभी विकल्प खुले हैं, जिसमें ईमानदारी और पंजाब के मसलों के हल के लिए इच्छा शक्ति नजर आएगी, उसका समर्थन किया जाएगा। अगर कांग्रेस भी अपने गलत नेताओं को हटा कर नीति में बदलाव करती है तो उसका समर्थन करने का विकल्प भी खुला है। पार्टी न बनाने का फैसला सिर्फ इसलिए किया गया है ताकि सरकार के खिलाफ वोटों का बंटवारा न हो। आप के समर्थन के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो भी सूबे के हित में सही दिखा, उसका समर्थन किया जाएगा। सुच्चा सिंह छोटेपुर के साथ जाने के सवाल पर बैंस ने कहा कि उनकेसाथ वह लगातार संपर्क में हैं।