पिछले साल दिसंबर के अंत में चंडीगढ़ में हुए निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जो कमाल दिखाया, वो एक बानगी थी कि दस मार्च के बाद पंजाब पर किसका हक होगा। राजधानी से चली आप की हवा में विधानसभा चुनाव लड़ रहे बाकी दल तितर बितर हो गए और पहली बार एक पूर्ण राज्य में आम आदमी पार्टी ने सरकार बना ली। पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चंडीगढ़ की जीत के बाद दावा किया था कि ये जीत पंजाब में आने वाले बदलाव का संकेत है। इसके अलावा पिछली बार बिना सीएम चेहरे के मैदान में उतरी पार्टी ने इस बार कोई रिस्क नहीं लिया और भगवंत मान को बतौर सीएम प्रोजेक्ट कर चुनाव में उतरी।
राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि पंजाब में केजरीवाल के फ्री के मॉडल पर मुहर लगी। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया है। फ्री शिक्षा समेत कई तरह के वादे किए हुए हैं, इनमें खासतौर पर अनुसूचित जाति के बच्चों का ध्यान रखा जाएगा। हर महिला को प्रतिमाह एक हजार रुपये देने की घोषणा की गई। दवाइयां और सभी टेस्ट समेत इलाज मुफ्त करने के वादे के साथ ही हर व्यक्ति को हेल्थ कार्ड देने का वादा किया गया। जिसमें उसकी हर जानकरी दर्ज होगी। 16000 मोहल्ला क्लीनिक खोले जाएंगे। हर गांव में मोहल्ला क्लीनिक होगा। सरकारी अस्पतालों को ठीक किया जायगा। बड़े स्तर पर नए अस्पताल खोले जाएंगे और किसी का रोड एक्सीडेंट होने पर पूरा इलाज सरकार करवाएगी।
पंजाब में 1997 के विधानसभा चुनाव में पंजाब के 20 प्रतिशत वोट निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गए थे। 2014 में आम आदमी पार्टी पंजाब में सक्रिय हुई और 2017 के विधानसभा चुनाव में दोकोणीय चुनाव त्रिकोणीय हो गया। ऐसे में निर्दलीयों का वोट आप की तरफ खिसक गया।
पंजाब और उसके आस पास के क्षेत्रों में 80-90 के दशक में भगवंत मान कॉमेडी का पर्याय माने जाते थे। उनकी अदाकारी के लोग दीवाने थे। वे शुरू से आम आदमी पार्टी के साथ जुड़े लेकिन 2017 में पार्टी बिना सीएम फेस के मैदान में उतरी। नतीजा उसे हार के तौर पर मिला। 2022 में अरविंद केजरीवाल ने हार से सबक लिया और भगवंत मान को एक सर्वे के आधार पर पार्टी का सीएम चेहरा घोषित कर दिया। इससे पार्टी को काफी फायदा मिला।
आम आदमी पार्टी के साथ कोई बड़ा विवाद नहीं जुड़ा। 2017 चुनाव में अरविंद केजरीवाल के एक तथाकथित आतंकी के घर रुकने से हिंदू वोट बैंक आप से छिटक गया था। राजनीतिक माहिरों के अनुसार, पार्टी की हार का यही कारण था। वहीं 2022 में भी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास ने केजरीवाल पर अलगाववादियों के समर्थक होने का आरोप लगाया था। इसके अलावा पार्टी के साथ कोई बड़ा विवाद नहीं जुड़ा।
2017 से पहले पंजाब में जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं। हमेशा से चुनाव में कांग्रेस और शिअद में आमने-सामने की ही टक्कर होती रही है। 2017 में आम आदमी पार्टी के चुनाव में प्रवेश करते ही बदलाव की बयार बननी शुरू हो गई थी। रही सही कसर 2021 में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन टूटने से पूरी हो गई। इससे लोगों को एक नया विकल्प मिला और आप सत्ता में काबिज हो गई।