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सुखपाल खैरा को शहीद नहीं बनने देगा 'आप' हाईकमान, फिलहाल कार्रवाई के नहीं मिल रहे संकेत

Fri, 03 Aug 2018 10:04 AM IST
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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आप नेता सुखपाल खैहरा - फोटो : फाइल फोटो
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आप नेता कुमार विश्वास ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल ने मुझसे कहा था कि मैं तुम्हें मारूंगा पर शहीद नहीं बनने दूंगा। पंजाब के पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा के मामले में भी पार्टी ने यही रुख अख्तियार करने का फैसला किया है।
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आप हाईकमान ने संकेत दिए हैं कि बठिंडा में कन्वेंशन कर बगावत करने वाले नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। सूबा सह-प्रधान डॉ. बलबीर सिंह ने तो हाईकमान से अपील भी कर दी है कि कोई कार्रवाई न की जाए। आप के थिंक टैंक को पता था कि अगर वे इस समय खैरा और उनके समर्थक विधायकों को सस्पेंड करते हैं तो उनके प्रति चल रही सहानुभूति की लहर और गहरी हो जाएगी। पार्टी पर दोतरफा दबाव भी था। 

पंजाब भर में वॉलंटियर्स की सहानुभूति खैरा के साथ बढ़ रही थी। हालत यह थी कि सोशल मीडिया पर नेता आप के पक्ष में पोस्ट डालने तक से कतरा रहे थे। वॉलंटियर्स ने भगवंत मान, बलजिंदर कौर को बुरी तरह आड़े हाथों लिया था। इसके अलावा एनआरआई का भी खैरा को जबरदस्त समर्थन मिल रहा था। पार्टी को वॉलंटियर्स और एनआरआई को वापस लाने केलिए कुछ समय चाहिए। इसलिए आप ने फिलहाल उन्हें ऐसे ही छोड़ने का फैसला किया है। 
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वॉलंटियर्स और एनआरआई को दोबारा अपनी तरफ करने के लिए पार्टी ने अपने स्टार और राष्ट्रीय कन्वीनर अरविंद केजरीवाल की रैली करने का फैसला किया है। यह फैसला गुरूवार को दिल्ली में केजरीवाल की अगुवाई में हुई बैठक में लिया गया। पंचायत चुनाव का बिगुल फूंकने की आड़ में रैली की जाएगी। लेकिन उसका मकसद खैरा गुट के साथ गए वॉलंटियर्स को दोबारा पार्टी से जोड़ना होगा।
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Sukhpal Singh Khaira
वर्करों की नब्ज पकड़ी, पर नहीं ला पाए विधायक
राजनीति के पुराने खिलाड़ी सुखपाल खैरा वॉलंटियर्स की नब्ज पकड़ने में पूरी तरह कामयाब रहे। सिर्फ मालवा ही नहीं, दोआबा और माझा से भी वर्कर पहुंचे। ये किराए पर लाई गई भीड़ नहीं थी। बल्कि, भावुक तौर पर वे खैरा के साथ जुड़े नजर आ रहे थे। इसमें एनआरआई का बड़ा योगदान रहा, उन्होंने अपने गांवों में फोन कर लोगों को लामबंद किया।

वर्करों के मूड को देखते हुए ही खैरा गुट ने तीखे प्रस्ताव रखे। लेकिन तमाम कोशिशों और दबाव के बावजूद वे विधायकों को अपने साथ नहीं ला सके। प्रेस कांफ्रेंस के समय खैरा समेत नौ विधायक थे, बाद में आठ हुए। पर रूपिंदर कौर रूबी भी नदारद रहीं और खैरा गुट की संख्या सात पर सिमट गई।

महंगा पड़ सकता है प्रस्तावों पर अमल
सियासी हलकों में चर्चा रही कि खैरा गुट ने कन्वेंशन में जो प्रस्ताव पास किए हैं, उन पर अमल महंगा पड़ सकता है। उन्होंने मौजूदा संगठनात्मक ढांचा भंग करके नया ढांचा बनाने की बात कही है। जबकि, पार्टी संविधान के तहत उनके पास इसका अधिकार नहीं है। चंडीगढ़ में बैठक कर नया नेता प्रतिपक्ष चुनने की बात कही है, इसका अधिकार भी उनके पास नहीं है।

ऐसी किसी भी स्थिति में विधायकों को अपनी सदस्यता से हाथ धोना पड़ेगा। खैरा या अन्य विधायक ऐसा करेंगे, इसकी उम्मीद नहीं है। लेकिन खैरा भी पुराने सियासतदान हैं, ये बातें जानने के बाद भी उन्होंने एलान किया है तो कोई रणनीति तो रही ही होगी।

कन्वेंशन में जाने वाले गुमराह - आप
आप के सूबा सह प्रधान डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि कन्वेंशन में हिस्सा लेने वाले नेता गुमराह हैं और साजिश का हिस्सा बन रहे हैं। उम्मीद है कि ये जल्द ही पार्टी नियमों के तहत वापस आएंगे। आप के बैनर तले सूबा और केंद्रीय लीडरशिप को पूछे बिना कन्वेंशन करना गलत है। अकाली-भाजपा, संघ और बैंस ब्रदर्स द्वारा पूरा जोर लगाने के बाद भी दावों से बहुत कम लोग पहुंचे, 14 विधायकों के आने के बात भी झूठ निकली।
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