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चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव: ग्रामीण इलाकों में भाजपा-कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है 'आप'

Sat, 25 Dec 2021 12:19 PM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी को खड़ा करना ही बड़ी चुनौती थी। ऐसे में चुनाव लड़ने का विचार भी नहीं हो सकता था। कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद प्रदीप छाबड़ा ने दिल्ली जाकर आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली। इसके बाद उनके समर्थक भी आप में शामिल हुए।
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चंडीगढ़ नगर निगम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के लिए एक माह तक चले चुनावी संग्राम के बाद प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला अब ईवीएम में कैद हो चुका है। नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस को टक्कर देने के लिए पहली बार आम आदमी पार्टी ने ताल ठोकी थी। सियासी पंडितों का कहना है कि गांव समेत कई क्षेत्रों में आप प्रत्याशियों ने बड़ी पार्टियों को नुकसान पहुंचाया है। इससे जहां जीत का अंतर कम हो सकता है, वहीं पार्टी कुछ सीटों पर जीतती हुई भी नजर आ रही है। हालांकि इसका पता अब 27 दिसंबर को ही चलेगा। 

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मतदान से पहले तक लोग शहर में भाजपा, कांग्रेस और आप के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना जता रहे थे। सियासी जानकारों के मुताबिक, इस बार आप की नगर निगम में एंट्री हो सकती है, लेकिन सत्ता में आने के लिए पार्टी को अभी इंतजार करना होगा। उधर, सियासी पंडितों के आकलन से भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खलबली है।  

पार्टी को खड़ा करना था चुनौती, विपक्षियों के लिए आज बनी रोड़ा

शहर में आम आदमी पार्टी को खड़ा करना ही बड़ी चुनौती थी। ऐसे में चुनाव लड़ने का विचार भी नहीं हो सकता था। कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद प्रदीप छाबड़ा ने दिल्ली जाकर आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली। इसके बाद उनके समर्थक भी आप में शामिल हुए। इसके बाद निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी तीसरे विकल्प के रूप में लोगों के सामने खड़ी हुई। 

हालांकि पार्टी चुनाव लड़ेगी या नहीं, इस पर आखिरी वक्त तक मंथन चलता रहा। अंत में पार्टी ने चुनाव लड़ने का मन बनाया। आप के अस्तित्व से जुड़े लोगों को छाबड़ा के साथ आए लोगों से भी नाराजगी रही। इस दौरान व्हाट्सएप समूह से लेकर पार्टी की बैठकों तक में विरोध के स्वर उठने लगे, लेकिन पार्टी ने चुनाव लड़कर विपक्षियों की जड़ों को कमजोर किया है।

19 का आंकड़ा छूने के लिए स्पष्ट बहुमत की दरकार

भाजपा और कांग्रेस के समर्थक अपनी पार्टी को स्पष्ट बहुमत से निगम में सरकार बनाने की बात कह रहे हैं, लेकिन मतदान के बाद से अब 19 का आंकड़ा भी एक लक्ष्य बन गया है। 35 में से 19 सीटें लाने वाली पार्टी को सत्ता मिलेगी, ऐसे में पार्टियों को जोड़तोड़ से कुर्सी मिलेगी या सत्ता में बदलाव आएगा, इसे लेकर अभी तक कोई स्पष्ट दावा नहीं कर सका है। चुनावी गलियारों में चर्चा है कि प्रत्याशियों को दो दिन अभी कुछ भाएगा नहीं।

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