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Chandigarh: चंडीगढ़ में मेयर चुनाव से पहले आप ने बढ़ाया प्रदीप छाबड़ा का कद, गुटबाजी पर विराम की कोशिश

Fri, 13 Jan 2023 12:05 PM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मेयर चुनाव आप और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। कांग्रेस अपने 6 पार्षदों के साथ गेम चेंजर की स्थिति में खड़ी है। पूरे साल सदन में दो खेमों में दिखी आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस बार नया दांव खेल दिया है।
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सीएम भगवंत मान के साथ प्रदीप छाबड़ा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ मेयर चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी (आप) ने चंडीगढ़ के प्रदेश सह प्रभारी प्रदीप छाबड़ा को पंजाब के लार्ज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड का चेयरमैन बना दिया है। माना जा रहा है पार्टी को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए आप ने यह दांव खेला है।
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राजनीतिक पंडितों का मानना है कि छाबड़ा का कद बढ़ाकर पार्टी में काफी समय से चल रही गुटबाजी की आशंकाओं पर विराम लगाने की कोशिश की गई है। अब आप को अपने पार्षदों को बचाने की चिंता छोड़कर जीत के लिए दो वोट का इंतजाम करने में जुटना होगा। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपने पत्ते पूरी तरह न खोलकर चुनाव में रोमांच को बरकरार रखा है।

मेयर चुनाव आप और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। कांग्रेस अपने 6 पार्षदों के साथ गेम चेंजर की स्थिति में खड़ी है। पूरे साल सदन में दो खेमों में दिखी आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस बार नया दांव खेल दिया है। आप के मेयर पद के उम्मीदवार जसबीर सिंह लाड्डी को प्रदेश अध्यक्ष प्रेम गर्ग के खेमे का माना जाता है। ऐसे में वीरवार दोपहर में प्रदीप छाबड़ा की पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक हुई और शाम होते-होते उन्हें पंजाब के लार्ज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड का चेयरमैन बना दिया गया। इसके बाद विधायक जरनैल सिंह और चंडीगढ़ के प्रभारी कुलवंत सिंह के साथ प्रदीप छाबड़ा जसबीर लाड्डी का हाथ पकड़कर नामांकन करवाने पहुंचे। 
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भाजपा में दिखी नाराजगी, दबे मुंह विरोध भी जताया 
सूत्रों की मानें तो जैसे ही भाजपा में मेयर चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम तय किए विरोध शुरू हो गया। वरिष्ठों की अनदेखी को लेकर पार्षदों ने चयन का आधार पूछा। अचानक से अनूप गुप्ता का नाम सामने आते ही पार्षदों में शांति छा गई लेकिन संगठन से तय हुए नामों को ही अंतिम मुहर लगी। इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता पार्षदों को एकजुट करने के लिए हाथ पकड़कर ले जाते भी दिखे।

कांग्रेस ने वॉकआउट किया तो भाजपा को मिलेगा सीधा फायदा 
पिछली बार कांग्रेस पार्षदों ने चुनाव का बहिष्कार कर सदन से वॉकआउट कर दिया था। इस बार कांग्रेस क्या करेगी, यह अभी तय नहीं है। अगर कांग्रेस ने वोट नहीं किया और पिछली बार की तरह सदन से वॉकआउट किया तो भाजपा को सीधा फायदा मिलेगा और उनका मेयर बनना तय हो जाएगा। अब हर किसी की नजर कांग्रेस के फैसले पर टिकी है। बता दें कि पिछले साल मेयर चुनाव में पार्षदों को टूटने से बचाने के लिए कांग्रेस हाईकमान उनको लेकर जयपुर जाना चाहता था लेकिन पार्षद हरप्रीत कौर बबला ने भाजपा को समर्थन देने का एलान कर दिया। इसके बाद कांग्रेस किसी तरह अपने 7 पार्षदों को लेकर जयपुर चली गई। चुनाव से पहले पार्टी पार्षदों को लेकर लौटी लेकिन मतदान नहीं किया। आप और भाजपा की लड़ाई में मेयर भाजपा का बन गया। साल के बीच में कांग्रेसी पार्षद गुरचरण सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए। अब कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं। कांग्रेस कुल मिलाकर अपने पार्षदों को टूटने से बचाना चाहती है। उधर, आप का समर्थन करने के लिए कांग्रेस को अब तक दिल्ली से हरी झंडी नहीं मिली है। 
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