नए नियमों के तहत स्ट्रीट वेंडरों को तय क्षेत्र में ही व्यापार करने की अनुमति होगी। इसके लिए जिओ फेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक जीपीएस के माध्यम से वेंडरों की लोकेशन ट्रैक करेगी। यदि कोई वेंडर तय क्षेत्र से बाहर दुकान लगाने का प्रयास करेगा तो उसकी पहचान तुरंत सिस्टम में आ जाएगी।
चंडीगढ़ नगर निगम ने स्ट्रीट वेंडरों के लाइसेंस को आधार कार्ड से जोड़ने और जिओ फेंसिंग के जरिये लोकेशन ट्रैक करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए निगम ने आईटी मंत्रालय को पत्र लिखा है। इससे फर्जी लाइसेंस की आसानी से पहचान हो सकेगी और अवैध वेंडरों की दुकानदारी बंद होगी।
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निगम को शिकायत मिल रही थी कि कई वेंडर एक ही लाइसेंस का उपयोग कर रहे हैं। कुछ लाइसेंस के कलर फोटोस्टेट कराकर दूसरे एरिया में भी दुकानें लगा रहे हैं। इसके अलावा कुछ वेंडर अपने क्षेत्र से बाहर अवैध तौर पर दुकान लगा रहे हैं। इससे शहर में अतिक्रमण और अव्यवस्थाएं बढ़ रही थीं। इस पर रोक लगाने के लिए निगम अब ठोस कदम उठा रही है। इसके अलावा वेंडरों को फेस रिकग्निशन तकनीक से भी जोड़ने की योजना बनाई जा रही है ताकि उनकी पहचान डिजिटल रूप से सुरक्षित रहे। पीएम स्वनिधि योजना की प्रगति के संबंध में पिछले साल केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इस पर काम करने के निर्देश दिए गए थे।
दूसरे एरिया में वेंडर दुकान लगाएगा तो मिलेगा अलर्ट
नए नियमों के तहत स्ट्रीट वेंडरों को तय क्षेत्र में ही व्यापार करने की अनुमति होगी। इसके लिए जिओ फेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक जीपीएस के माध्यम से वेंडरों की लोकेशन ट्रैक करेगी। यदि कोई वेंडर तय क्षेत्र से बाहर दुकान लगाने का प्रयास करेगा तो उसकी पहचान तुरंत सिस्टम में आ जाएगी और उसके खिलाफ इंफोर्समेंट विंग की तरफ से कार्रवाई की जाएगी। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आधार और फेस रिकग्निशन तकनीक से हर वेंडर की सटीक पहचान दर्ज होगी और एक लाइसेंस पर एक ही व्यक्ति को दुकान लगाने की अनुमति मिलेगी। इससे अनधिकृत वेंडरों पर लगाम लगेगी और अवैध कब्जों की समस्या का समाधान भी होगा।
इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा अवैध वेंडर
सेक्टर-15, 22, 19, 17, 40 और मनीमाजरा में अवैध वेंडरों की समस्या ज्यादा है। हालात ये हैं कि गलियारे को कब्जाने के बाद सामान लोगों के चलने के रास्ते और उसके बाद पार्किंग तक पहुंच गया है। सेक्टर-15 की पटेल मार्केट, सेक्टर-22 की शास्त्री मार्केट, सेक्टर-37डी की मार्केट, कृष्णा मार्केट-41 समेत कई इसके उदाहरण हैं। निगम में 10,920 वेंडर पंजीकृत हैं, लेकिन करीब तीन हजार वेंडर ही हर माह लाइसेंस फीस जमा करवा रहे हैं जबकि शहर में इससे चार गुना वेंडर काम कर रहे हैं। निगम ने हाल ही में करीब चार हजार वेंडरों का लाइसेंस रद्द भी किया है।