संविधान ने न्यायपालिका को इंसाफ देने का जिम्मा सौंपा है, लेकिन जिन जज को यह जिम्मा सौंपा गया है, उन्हें खुद रिटायरमेंट तक इंसाफ नहीं मिला। हालांकि हाईकोर्ट द्वारा प्रशासनिक स्तर पर उन्हें प्रमोट न किए जाने के फुल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने खारिज करते हुए उन्हें प्रमोट करने और पेंशन व अन्य लाभ उस प्रमोशन के अनुरूप दोबारा निर्धारित करने के आदेश दिए हैं।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एबी चौधरी एवं जस्टिस पीबी बजंतरी की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के प्रशासकीय पक्ष के फैसले को रद्द करते हुए यह अहम आदेश जारी किए हैं। आदेशों में कहा गया कि पंजाब के एडिशनल सिविल जज (सीनियर डिवीजन) जज जेएस खुशदिल को वर्ष 1999 में एडिशनल सेशन जज के पद पर सिर्फ इसीलिए प्रमोशन नहीं दिया गया कि वे चार वर्ष से अधिक समय तक डेपुटेशन पर रहे थे।
खुशदिल ने उन्हें प्रमोशन नहीं दिए जाने के हाईकोर्ट के प्रशासकीय पक्ष के आदेशों को 2009 में याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी। लेकिन याचिका के लंबित रहते ही वह सेवानिवृत्त हो गए । कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याची के जूनियर को प्रमोट करने की तिथि से याचिकाकर्ता की प्रमोशन मानी जाए ओर उसी आधार पर गणना कर सभी लाभ जारी किए जाएं। हाईकोर्ट के फैसले से पंजाब एवं हरियाणा की जिला अदालतों के उन सभी जजों को बड़ी राहत मिली है जोकि हाईकोर्ट द्वारा डेपुटेशन पर बाहर भेजे गए थे।