यूटी प्रशासन ने वर्ष 2019 में बिजली विभाग को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया शुरू की थी। वर्ष 2020 में कोरोना ने दस्तक दी तो प्रक्रिया की रफ्तार थम गई। इसके बाद 9 नवंबर 2020 को प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने इच्छुक कंपनियों से आवेदन मांगे थे। मामला पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलते ही प्रशासन ने वित्तीय बोली को खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
बिजली खरीदने के लिए हर साल खर्च होते हैं 640 करोड़
चंडीगढ़ के लिए बिजली खरीदने में हर साल 640 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। यूटी बिजली विभाग 3.26 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदता है। चंडीगढ़ का अपना कोई बिजली उत्पादन नहीं है। यहां रोजाना औसतन 400 मेगावाट बिजली की खपत है। बिजली विभाग विभाग केंद्रीय उत्पादन स्टेशनों (सीजीएस) से बिजली खरीदता है। इसमें नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनटीपीसी), नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी), न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल), भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी), सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) और टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (टीएचडीसी) शामिल हैं। गर्मी के दिनों में मांग को पूरा करने के लिए बिजली विभाग कभी-कभी अन्य जगहों से भी अतिरिक्त बिजली की खरीद करता है।
चंडीगढ़ के बिजली विभाग को खरीदने की दौड़ में कुल सात कंपनियां थीं। इनमें एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के अलावा अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टेरेलाइट पावर, रिन्यू विंड एनर्जी और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड शामिल थीं।
शहर में इस समय 2.47 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 2.14 लाख लोग घरेलू बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अन्य कामर्शियल, स्मॉल पावर, पब्लिक लाइटिंग और कृषि के कनेक्शन हैं। निजीकरण होने के बाद बिजली के दाम कम भी हो सकते हैं या बढ़ भी सकते हैं। पिछले कई सालों से शहर में बिजली के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं।
चंडीगढ़ बिजली विभाग को खरीदने के लिए लगी बोली
- एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड- 871 करोड़
- अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड- 471 करोड़
- टाटा पावर- 426 करोड़
- टोरेंट पावर - 606 करोड़
- स्टेरेलाइट पावर - 201 करोड़
- रिन्यू विंड एनर्जी - 551.50 करोड़
- एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड - 563 करोड़