फरीदकोट के मेडिकल कॉलेज में पड़े वेंटिलेटर।
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पंजाब में पीएम केयर फंड से भेजे गए 809 वेंटिलेटर को लेकर बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। वेंटिलेटरों की आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने इंस्टालेशन को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। कंपनियों ने पंजाब सरकार से कहा है कि उनके पास इसके लिए तकनीकी स्टाफ उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ये वेंटिलेटर पंजाब सरकार के लिए सफेद हाथी बनकर रह गए हैं।
पंजाब सरकार की ओर से स्वास्थ्य विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी हुस्न लाल ने केंद्र को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है। हुस्न लाल की तरफ से भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि आपूर्ति वाली कंपनियों से तय स्थानों पर वेंटिलेटर स्थापित करने के लिए संपर्क किया गया था।
राज्य में चल रही कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का भी हवाला कंपनी प्रतिनिधियों को दिया गया था, लेकिन अभी तक इस पर कोई अमल नहीं किया गया है। कंपनी प्रतिनिधियों की तरफ से हवाला दिया गया है कि अभी उनके पास वेंटिलेटर इंस्टाल करने के लिए न तो जरूरी औजार हैं और न ही तकनीकी स्टाफ। अब पंजाब सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मनदीप कुमार भंडारी को पंजाब सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी हुस्न लाल ने इस मामले में हस्तक्षेप कर राहत दिलाने की मांग की है।
फरीदकोट अस्पताल में भी दो बार में कुल 82 वेंटिलेटर आए लेकिन इनमें से ज्यादातर तो एक बार प्रयोग नहीं किया जा सका। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि यह वेंटिलेटर घटिया क्वालिटी के है और 82 में से 62 तो पहले दिन से खराब निकले थे जिसके बारे में पंजाब सरकार को सूचित कर दिया गया था जहां से भारत सरकार तक सूचना पहुंचा दी गई थी। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ.राज बहादुर ने कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इस समय 42 वेंटिलेटर सही हालत में कार्य कर रहे है। पीएम केयर फंड वाले 62 वेंटिलेटर खराब है जिसके बारे में कंपनी से भी बात हो चुकी है जिन्होंने जल्द ही मैकेनिक भेजकर चालू करवाने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने उन्हें 10 नए वेंटिलेटर खरीदने की इजाजत दे दी है और अगले 10 दिनों में नए वेंटिलेटरों से कोरोना मरीजों को राहत मिलेगी।