निजी कंपनियों व ट्रस्ट आदि को श्रम विभाग हरियाणा की वेबसाइट पर उपलब्ध पोर्टल पर सकल मासिक वेतन या 30 हजार रुपये से अधिक वेतन प्राप्त करने वाले अपने सभी कर्मचारियों को पंजीकृत करना अनिवार्य है। इस कानून के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन दंडनीय अपराध है।
- स्टार्टअप को इस कानून में दो साल की छूट रहेगी
- हरियाणा के मूल निवासी को ही योजना का लाभ मिलेगा
- उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के उपनिदेशक स्तर के अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे
- ईंट-भट्ठों पर यह नियम लागू नहीं होगा, वहां ओडिशा व झारखंड के श्रमिक काम करेंगे, इस तरह के श्रमिक हरियाणा में उपलब्ध नहीं हैं
- निर्माण क्षेत्र के कार्यों में पश्चिमी बंगाल के कामगारों को प्राथमिकता रहेगी। इसमें उन्हें महारत हासिल है
- आईटीआई पास युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलेगी
जानकारी छुपाने पर ये होगी कार्रवाई
कोई कंपनी, फैक्टरी, संस्थान, ट्रस्ट अपने कर्मचारियों की जानकारी छुपाएगा तो जुर्माने का प्रावधान है। निजी सेक्टर में कार्यरत किसी भी कर्मचारी को हटाया नहीं जाएगा। 30 हजार रुपये तक की नौकरी वाले हर कर्मचारी को श्रम विभाग की वेबसाइट पर अपने नाम का पंजीकरण कराना होगा। यह निशुल्क है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित कंपनी, फर्म अथवा रोजगार प्रदाता की होगी। जो कंपनी अपने कर्मचारी की सूचना पंजीकृत नहीं करवाएगी उसे हरियाणा स्टेट एम्प्लॉयमेंट टू लोकल केंडिडेट्स एक्ट-2020 के सेक्शन-3 के तहत 25 हजार से एक लाख रुपये तक जुर्माना किया जा सकेगा। अगर फिर भी कंपनी कानून का उल्लंघन करती है तो उसे हर रोज पांच हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।
ये रहेगा कानून का प्रारूप
हरियाणा स्टेट एम्प्लॉयमेंट टू लोकल कैंडिडेट्स एक्ट-2020 प्रदेश के सभी निजी उद्योगों, फर्म अथवा हर उस रोजगार प्रदाता पर लागू होगा, जहां 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यह नियम पहले से कार्यरत कर्मचारियों पर लागू न होकर नई भर्तियों पर लागू होगा।