बिना खर्च घर की छत पर सोलर प्लांट लगाने के लिए पर्यावरण विभाग अक्षय ऊर्जा सेवा कंपनी (रेस्को) मॉडल लेकर आया था लेकिन अभी तक इसे शहर में लागू नहीं किया गया है, क्योंकि संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) शहर में पहले एक जन सुनवाई करना चाहता है। कोरोना की वजह से जन सुनवाई का आयोजन अब तक नहीं हो पाया है।
विभाग ने जेईआरसी के कहने पर रेस्को मॉडल को लेकर एक सर्वे किया था। इसमें करीब 550 लोगों ने सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने की इच्छा जताई है। इस मॉडल के तहत बिना किसी खर्च के लोगों के घर की छत पर कंपनी की तरफ से सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे घर में रहने वाले उस बिजली को इस्तेमाल भी कर सकेंगे और उसे बेच कर कमाई भी कर सकेंगे। यह प्रोजेक्ट उन लोगों के लिए है, जो सोलर प्रोजेक्ट तो लगवाना चाहते हैं लेकिन निवेश नहीं करना चाहते।
यह है रेस्को मॉडल की खासियत
- सोलर पैनल लगाने का सारा खर्चा निजी कंपनी उठाएगी
- 15 साल तक पैनल की देखरेख का जिम्मा भी कंपनी का होगा
- भवन मालिक को मंजूरी देनी होगी, सरकार कंपनी को सब्सिडी देगी
- भवन मालिक को बिजली विभाग से भी कम दर यानी करीब 3.44 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलेगी
- अतिरिक्त बिजली को विभाग को सौंपा जा सकेगा, जेईआरसी के तहत कंपनी भवन मालिक को पैसे देगी
- 15 साल के बाद सोलर प्लांट भवन मालिक का हो जाएगा
वर्ष 2023 तक सौर ऊर्जा से 75 एमडब्ल्यू बिजली पैदा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसको लेकर विभाग सरकारी इमारतों के साथ निजी इमारतों पर भी सौर पैनल लगा रहा है। शिक्षा विभाग का बिल शून्य हो चुका है। - देबेंद्र दलाई, सीईओ, क्रेस्ट।