दिल्ली के साथ लगते जिलों में इसका प्रभाव अधिक रहा है। यह एक अलग रिसर्च का विषय है। ऐसा इसलिए भी संभव हो सकता है कि यह घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं और देश भर में पलायन के दौरान यहां से आवागमन भी अधिक हुआ।
विज ने कहा कि प्रदेश के 13 जिलों में राज्य की औसत 8 प्रतिशत से कम सेरो-सकारात्मकता पाई गई है। इनमें पानीपत में 7.4 प्रतिशत, पलवल में 7.4 प्रतिशत, पंचकूला 6.5 में प्रतिशत, झज्जर 5.9 प्रतिशत, अंबाला में 5.2 प्रतिशत, रेवाड़ी 4.9 प्रतिशत, सिरसा 3.6 प्रतिशत, हिसार 3.4 प्रतिशत, फतेहाबाद 3.3 प्रतिशत, भिवानी 3.2 प्रतिशत, महेंद्रगढ़ 2.8 प्रतिशत, कैथल 1.7 प्रतिशत तथा रोहतक में 1.1 प्रतिशत रहा है।
इसके अलावा एनसीआर जिलों में कोरोना का प्रभाव ज्यादा दिखाई दिया, जोकि 25.8 फीसदी रहा है। इनमें शहरी क्षेत्रो में 31.1 प्रतिशत और ग्रामीण में 22.2 प्रतिशत पाया है। फरीदाबाद में 25.8 प्रतिशत, नूंह में 20.3 प्रतिशत, सोनीपत में 13.3 प्रतिशत, गुरुग्राम में 10.8 प्रतिशत रहा है। इसी प्रकार करनाल में 12.2 प्रतिशत, जींद 11 प्रतिशत, कुरुक्षेत्र 8.7 प्रतिशत, चरखी दादरी 8.3 प्रतिशत और यमुनानगर 8.3 प्रतिशत रहा।
यह हमारी तत्परता और उपलब्धि है
अनिल विज ने बताया कि सीरो टेस्ट में आठ प्रतिशत लोग पॉजिटिव आए हैं। जिसमें से साढ़े सात प्रतिशत को कोरोनो होकर ठीक भी हो गया। यह हमारी तत्परता का नतीजा है कि आठ प्रतिशत ही पॉजिटिव आए। अन्य राज्यों में यह प्रतिशत हमसे ज्यादा है।