उद्योगों से पानी के सैंपल लेने बुलाई टीमें
दो बच्चों समेत 11 लोगों की मौत के बाद प्रदूषण बोर्ड और जिला प्रशासन एक्शन में आ गया है। उद्योगों से पानी के सैंपल लेने के लिए फॉरेंसिक टीमें बुलाई हैं। ये सैंपल खरड़ में बनी केमिकल लैब में टेस्ट होंगे। इसके साथ ही नगर निगम की टीमें भी लगातार सीवरेज की पाइपों को साफ कर रही हैं। टीमों ने हादसे में जान गंवाने वाले डॉ. कविलाश यादव के घर की पूरी जांच करने के साथ अंदर बनी होदियों को भी जांचा। इसके साथ नवनीत कुमार और गौरव गोयल के घर में भी जांच की गई।
लोग बोले- कई बार शिकायत दी लेकिन नहीं हुई सुनवाई
लोगों का कहना है कि फैक्ट्रियों की गलती के कारण ही 11 बेकसूर लोगों की जान गई है। प्रदूषण बोर्ड के कई अधिकारियों को शिकायत दी गई कि इलाके के सीवरेज में केमिकल युक्त पानी फेंका जाता है। परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई। अब हादसा हो गया तो अधिकारी भी पहुंच गए और इलाके में सफाई अभियान भी छेड़ दिया है। अगर पहले समय रहते सीवरेज साफ करवाया जाता तो यह हादसा नहीं होता।
हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा ज्यादा होने से हुआ अधिक नुकसान
बठिंडा हेडक्वार्टर से पहुंचे एनडीआरएफ के कमांडेंट डीएल जाखड़ ने बताया कि करीब 70 मुलाजिम राहत कार्य में जुटे हैं। हैंडहैल्ड गैस डिटेक्टर की मदद से वायु गुणवत्ता जांची गई तो पता चला कि कुछ क्षेत्र में हाइड्रोजन सल्फाइड गैस की मात्रा ज्यादा है। हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) गैस काफी जानलेवा होती है। आशंका है कि यह सीवरेज से ही निकली है।