चंडीगढ़। हल्लोमाजरा के एक व्यापारी से 45.4 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। शातिर ठग ने खुद को बीमा लोकपाल बताकर अपने साथियों के साथ मिलकर व्यापारी की दो बीमा पॉलिसियों को अवैध बताकर फंसी रकम दिलाने का झांसा दिया। खास बात यह है कि ठग व्यापारी को 9 दिसंबर 2014 से 9 मार्च 2016 तक ठगते रहे। मामले में अब छह साल बाद औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में केस दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता दीप कांप्लेक्स हल्लोमाजरा निवासी कृष्ण प्रसाद ने बताया कि उन्होंने आर-एस सॉल्यूशन, सेक्टर-66, नोएडा के प्रबंध निदेशक के खिलाफ शिकायत दी है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, दिसंबर 2014 में उन्हें एक कॉल आई थी। कॉलर ने खुद को दिल्ली का बीमा लोकपाल अभिजीत सिंह बताते हुए कहा कि उन्होंने एलआईसी की जो पॉलिसी करवाई है, वह उन्हें धोखे से दी गइ है। उन्हें इसकी शिकायत मिली है। वह पॉलिसी बंद करवाकर रकम वापस पा सकते हैं। शिकायतकर्ता ने 54 हजार रुपये देकर दो पॉलिसियां करवाईं थीं। ठग ने कहा कि वह इंश्योरेंस कंपनी के जरिए रकम दिलवा सकता है। इसके लिए उसने रिलायंस कंपनी की 17,150 और 30,000 रुपये की दो पॉलिसियां लेने को कहा। रजामंदी के बाद ठग ने एक फर्जी एजेंट हर्षवर्धन को भेजा जो औद्योगिक क्षेत्र स्थित उनके कार्यायल से चेक ले गया। ठग ने भरोसा दिया कि उनके पैसे बयाज व बोनस समेत वापस मिल जाएंगे। इसके बाद आरोपी ने सात जनवरी 2015 को कॉल कर कहा कि रिलांयस ने एक ऑफर दिया है। सिर्फ दो लाख रुपये की राशि जमा करवाने पर कंपनी डूबी हुई राशि के साथ सात लाख का बोनस दे रही है। शिकायतकर्ता ने विश्वास कर फ्यूचर जेनराली लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के नाम से दो लाख रुपये का चेक एजेंट के जरिए दे दिया। 25 जनवरी तक रकम वापस न मिलने पर उन्होंने 26 को ठग को कॉल किया तो उसने कहा कि फाइल इनकम टैक्स विभाग में जमा कर दी है। एक घंटे बाद एक दूसरे व्यक्ति ने कॉल कर कहा कि वह इनकम टैक्स विभाग से ओपी मेहरा बोल रहा है। फाइल के हिसाब से उसकी रकम 10 लाख बनती है। इसके लिए छह लाख का टैक्स देना होगा जो बाद में 10 लाख रुपये के साथ वापस मिल जाएगा। शिकायतकर्ता ने यह रकम एक्साइड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के नाम से जमा करवा दी लेकिन पैसे नहीं मिली। दोबारा कॉल करने पर ठग ने कहा कि वह इनकम टैक्स कर्मी से बात करे। उसे कॉल करने पर उसने कहा कि उसे सीबीआई अधिकारियों से पकड़ लिया है। छूटने पर ही वह रकम जमा करवाएगा। कुछ दिन बाद शिकायतकर्ता को तीसरे ठग का कॉल आया, जिसने खुद को एचडीएफसी बैंक, दिल्ली का कर्मी बताते हुए कहा कि उनकी 16 लाख रुपये की फाइल उसके पास है लेकिन रकम ब्लॉक करवा दी गई है। ऐसे में छह लाख रुपये जमा करवाने होंगे, जिसके बाद ही 16 लाख मिलेंगे। कृष्ण प्रसाद ने यह रकम भी दे दी लेकिन पैसे नहीं आए।
बाद में शिकायतकर्ता को महिला ठग का कॉल आया, जिसने कहा कि वह बीमा लोकपाल दफ्तर से बोल रही है और फाइल में 71 हजार रुपये की फीस बकाया है। उसने कहा कि निजी टूर एवं ट्रेवल कंपनी के नाम से चेक काट यह रकम जमा करवानी होगी। शिकायतकर्ता को कई एजेंट और अधिकारियों का कॉल आया और कहा कि उसकी रकम काफी ज्यादा है इसलिए नॉमिनी रखवाना होगा। ठगों के कहने पर शिकायतकर्ता ने इमगा वैल्यू सर्विस के खाते में चार लाख रुपये जमा करवा दिए। फिर एक ठग ने पीएनबी का प्रबंधक बन नत्थूराम के नाम से फोन किया और उसने भी चार से पांच लाख रुपये ठग लिए। इसके बाद एक एजेंट की कॉल आई जिसने खुद को बीमा लोकपाल का सहायक 0बताया और 1,02,000 रुपये जमा करवा लिए। पीड़ित का कहना है कि अब उनके परिवार की मानसिक और आर्थिक हालत खराब हो गई है। पुलिस ठगों को जल्द पकड़े।