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Chandigarh News: 10 करोड़ के कथित फर्जी डेबिट की जांच में 4.366 किलो सोना जब्त

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10 करोड़ के कथित फर्जी डेबिट की जांच में 4.366 किलो सोना जब्त
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दो ज्वेलरी प्रतिष्ठानों से 5.59 किलो सोना-आभूषण मिले, शुद्ध सोने की मात्रा 4.366 किलो आंकी गई 37.82 करोड़ के लेनदेन और पांच संपत्तियों में निवेश की भी जांच
परीक्षित सिंह
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड से जुड़े 10 करोड़ रुपये के कथित फर्जी डेबिट की जांच में सोने के कारोबार, नकदी की डिलीवरी और रियल एस्टेट में करोड़ों के निवेश का ब्योरा सामने आया है। चार्जशीट में दर्ज विवरण के मुताबिक, 29 मई 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर-23सी स्थित दो प्रतिष्ठानों से कुल 5,590.410 ग्राम सोना और आभूषण जब्त किए गए। इनकी 24 कैरेट के हिसाब से शुद्ध सोने की मात्रा 4,366.340 ग्राम यानी करीब 4.366 किलो आंकी गई। जांच में मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के कर्मचारियों के बयान, रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा से जुड़े 37.82 करोड़ रुपये के लेनदेन और पांच संपत्तियों में करीब 55 करोड़ रुपये के निवेश का दावा भी शामिल है। हालांकि, जब्त सोने का कथित फर्जी डेबिट से सीधा संबंध स्थापित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
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दो प्रतिष्ठानों से सोना और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त
चार्जशीट के मुताबिक, 29 मई 2026 को एम/एस श्री कम्प्यूटरीकृत गोल्ड टेस्टिंग से 2,321.630 ग्राम सोना जब्त किया गया। इसकी 24 कैरेट के हिसाब से शुद्ध मात्रा 2,186.840 ग्राम आंकी गई। यहां से सीपी प्लस कंपनी का फुल एचडी नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर (एनवीआर) भी जब्त किया गया। इसी दिन एम/एस श्री ज्वेल्स से 3,268.780 ग्राम सोने के आभूषण मिले। इनकी शुद्ध सोने के बराबर मात्रा 2,179.500 ग्राम आंकी गई। दोनों प्रतिष्ठानों से जब्त सोना नई दिल्ली स्थित ईओ-III के मालखाने में जमा कराया गया।
ज्वेलर्स से नकदी पहुंचाने के बयान
चार्जशीट में मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के कर्मचारी मनीष और राहुल के बयानों का उल्लेख है। इनके मुताबिक, ज्वेलर्स से नकदी लेकर रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा के आवास और होटल लैंडमार्क तक पहुंचाई जाती थी। रिकॉर्ड में 14 जनवरी 2026 को 50-50 लाख रुपये की दो डिलीवरी और 17 जनवरी को एक करोड़ रुपये पहुंचाने का उल्लेख है। ये बयान जांच का हिस्सा हैं इनके आधार पर नकदी के स्रोत और कथित फर्जी डेबिट से संबंध का आकलन किया जाना है।
पांच संपत्तियों में करीब 55 करोड़ के निवेश का दावा
चार्जशीट में दर्ज विवरण के मुताबिक, वाधवा ने रिभव ऋषि से मिली रकम में से करीब 55 करोड़ रुपये पांच अचल संपत्तियों में निवेश करने की बात कही। इनमें सेक्टर-33सी का दो कनाल का मकान, जिसकी कीमत करीब 23 करोड़ रुपये बताई गई सेक्टर-21सी का एक कनाल का मकान, जिसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई गई सेक्टर-22 का एससीओ मुल्लांपुर के अमारी हिल्स स्थित फार्महाउस और ग्रेट पंजाब सोसाइटी का ए-306 प्लॉट शामिल हैं। दस्तावेजों में सेक्टर-21सी की संपत्ति के लिए 4.5 करोड़ रुपये नकद, एससीओ के लिए बिल्डवेल सलूजा एलएलपी को करीब 12 करोड़, फार्महाउस के लिए 2.25 करोड़ और प्लॉट के लिए चार करोड़ रुपये देने का उल्लेख है। प्लॉट के संबंध में वाधवा के नाम शेयर प्रमाणपत्र जारी होने की बात भी दर्ज है।
37.82 करोड़ के लेनदेन और 132 फोन कॉल की जांच
वाधवा से जुड़े 37.82 करोड़ रुपये के लेनदेन में करीब 4.57 करोड़ रुपये नकद और 33.25 करोड़ रुपये शेल कंपनियों के जरिये बैंक हस्तांतरण के रूप में बताए गए हैं। स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स और कैपको फिनटेक से जुड़े लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं। वाधवा पर रिभव ऋषि के बैंक खाते खुलवाने और धन हस्तांतरण में मदद करने के आरोप हैं। साथ ही, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 50 करोड़ रुपये की सीमा हटवाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित करने की कथित कोशिश का भी उल्लेख है। रिकॉर्ड के अनुसार, 6 जून 2024 से 31 जनवरी 2026 के बीच रिभव ऋषि और वाधवा के बीच 132 फोन कॉल हुईं।
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बुलियन कारोबारियों के बयान, डिजिटल साक्ष्य फॉरेंसिक जांच में
चार्जशीट में बुलियन कारोबारी दादासो चव्हाण, जगदीश पाटिल और मनोज भोसले के बयानों का भी उल्लेख है। इनमें हिसाब में दर्ज और हिसाब से बाहर नकदी लेनदेन की बात कही गई है। सवान ज्वेलर्स के मालिक राजन सिंह कटोडिया से 27 फरवरी 2026 को सीसीटीवी की दो हार्ड डिस्क जब्त की गईं। इन्हें 18 मार्च को केंद्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशाला (सीएफएल), पंचकूला भेजा गया। कटोडिया की ओर से दिए गए आईफोन-16 प्रो मैक्स और आईफोन-12 प्रो मैक्स भी जब्त कर 20 मार्च को सीएफएल में जमा कराए गए। वोडाफोन आइडिया से मिली सीडी में प्रमाणित कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), ग्राहक आवेदन फॉर्म (सीएएफ) और संबंधित प्रमाणपत्र शामिल हैं। संदिग्ध हस्तलिपि, हस्ताक्षर, मुहरों और फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों को भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19 के तहत अभियोजन स्वीकृति लंबित बताई गई है। आरोपों और जब्त सोने के कथित फर्जी डेबिट से संबंध का अंतिम निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।
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