चंडीगढ़। बुड़ैल मॉडल जेल में कोरोना को फैलने से रोकने के लिए करीब 400 कैदियों को स्पेशल पैरोल व अंतरिम जमानत दिए जाने का फैसला लिया गया है। यह फैसला पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा गठित की गई हाई पावर्ड कमेटी की वर्चुअल की बैठक में हुई। जस्टिस जसवंत सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में चंडीगढ़ के डीजीपी संजय बेनीवाल, होम सेक्रेटरी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इस दौरान यह फैसला भी लिया गया कि 70 प्रतिशत उन कैदियों को छोड़ा जाएगा जो सजा पा चुके हैं। हालांकि इसके लिए कुछ नियम तय किए गए हैं, जिस पर खरे उतरने वाले कैदी को ही पैरोल या फिर जमानत मिल सकेगी। उन अपराधी/कैदी को इसका फायदा नही मिल सकेगा, जो विदेशी नागरिक है। इसके अलावा कोरोना संक्रिमत या हेल्थ टीम की देखरेख में आने वाले कैदियों को छोड़ने का विचार किया जाएगा।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की निर्णय के बाद चंडीगढ में इस दिशा में काम शुरू किया गया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना, जस्टिस नागेस्वर राव और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने एक जजमेंट दी, जिसमें कैदियों और जेल में तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर फैसला लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन कैदियों को पिछले साल स्पेशल पैरोल और अंतरिम जमानत दी गई थी उन्हें दोबारा से रिलीज किया जाए ताकि जेलों को कोरोना संक्रमण से बचाया जा सके। लेकिन यह तय करना होगा कि पिछले वर्ष की तरह पैरोल या जमानत कि बाद जो कैदी नियमित समय पर लौट आए थे। उन्हें ही इसका लाभ मिल सके। उस केस का भी ख्याल रखना होगा, जो पिछले वर्ष वापस नहीं लौटे थे। इस वजह से जेल प्रशासन को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा था।
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कम सजा वाले कैदी को माफ करने पर विचार
वहीं, सूत्रों की मानें तो, जेल में जो कैदी छोटे केसों में सजा काट रहे हैं या जिनकी सजा अविध एक वर्ष से कम है, उनकी सजा को माफ करने पर विचार किया जा रहा है। अगले 2 से 3 दिनों में छोटे केसों और एक वर्ष से कम सजा काट रहे कैदियों को लेकर फैसला हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जेलों में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जल्द कदम उठाए जाएं।
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33 कैदी हुए हैं संक्रमित
बीते दो सप्ताह में मॉडल जेल में 3 महिला और 30 पुरुष कैदी कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। सुरक्षा के मद्देनजर इन सभी को कैदी को जेल में अलग से बनाए गए बैरक में आइसोलेट किया गया है। जेल प्रशासन अबतक सभी 937 कैदियों का कोरोना टेस्ट करवा चुका है। वहीं, कोरोना काल में पिछले साल भी कैदियों को पैरोल पर छोडा गया था, जिन्हें 4 से 5 महीने बाद दोबारा जेल में बुलाया गया था।