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Chandigarh News: सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों को 31.45 लाख मुआवजा

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चंडीगढ़। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ ने चार साल पहले सड़क हादसे में इंजीनियर की हुई मौत के मामले में परिवार को 31 लाख 45 हजार रुपये बतौर मुआवजा राशि देने के आदेश दिए हैं। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर तहसील के रहने वाले रविंद्र कुमार की 24 मई 2019 को कार व ट्रक की टक्कर में मौत हो गई थी। बेटे की मौत के बाद पिता सुरेश कुमार और माता रीता देवी की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दिनेश कुमार (गाड़ी चालक), दूसरा गीता नंद (गाड़ी मालिक), गौरव शर्मा (गाड़ी का पहला मालिक), कार का बीमा करने वाली न्यू इंडिया इंश्योरेंस, चंपा देवी (ट्रक मालिक), ट्रक का बीमा करने वाली द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ में याचिका लगाई थी। अदालत ने यह फैसला मृतक के माता-पिता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते सुनाया है।
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याचिकाकर्ताओं के वकील अश्वनी अरोड़ा ने बताया कि रविंद्र कुमार के माता-पिता ने बेटे की मौत के बाद मुआवजे की मांग को लेकर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका लगाई थी। पीड़ित परिवार ने 75 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। हालांकि ट्रिब्यूनल ने 31.45 लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला सुनाया है। मुआवजे की राशि कार की बीमा कंपनी को देनी होगी। यह राशि माता-पिता को आधी-आधी मिलेगी।


ट्रिब्यूनल में दायर याचिका में बताया गया था कि उनके बेटे रविंद्र कुमार ने सुंदरनगर में एक प्राइवेट कॉलेज से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रानिक्स में इंजीनियरिंग की थी। घटना वाले दिन वह मंडी से चंडीगढ़ के लिए कार (एचपी-31-बी-9601) में सफर कर रहा था। वह कार में ड्राइवर दिनेश कुमार के साथ आगे वाली सीट पर बैठा था। कीरतपुर स्वारघाट के बीच कैंची मोड़ (नैना देवी रोड) के पास एक ट्रक को ओवरटेक करते हुए गाड़ी गलत दिशा से आ रहे ट्रक नंबर एचपी-11-5037 के साथ टकरा गई। हादसे में रविंद्र कुमार बुरी तरह से घायल हो गया। उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डाक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कार चालक दिनेश कुमार लापरवाही और तेज रफ्तार से गाड़ी चला रहा था, जिस वजह से हादसा हुआ। वकील अश्वनी अरोड़ा ने अदालत को बताया कि रविंद्र इंजीनियरिंग का स्टूडेंट था और वह कम से कम 20 हजार रुपये प्रतिमाह कमा सकता था। वहीं, दूसरे पक्ष ने याचिका का विरोध भी किया, लेकिन ट्रिब्यूनल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मृतक के माता-पिता को 31.45 लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला सुनाया।
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