दो माह से 6 हजार रुपये मानदेय भी नहीं मिला, सीएम के प्रधान सचिव से मिले ऑपरेटर
हरियाणा परिवार पहचान पत्र अथॉरिटी ने निकाली थी कच्ची भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हरियाणा परिवार पहचान पत्र अथॉरिटी में दो माह पहले भर्ती किए गए सीपीएलओ (क्रीड पंचायत लोकल ऑपरेटर) का मानदेय दैनिक मजदूरी से भी कम है। सरकार की ओर से इनका मानदेय 6 हजार रुपये प्रति माह तय किया गया है। जबकि हरियाणा में अकुशल श्रमिक की दैनिक मजदूरी 326 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिक की 343 रुपये और कुशल श्रमिक की 378 से 398 रुपये मजदूरी है। जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर की दैनिक मजदूरी 200 रुपये बन रही है। इनके अलावा डीसी रेट भी हरियाणा में 14 हजार रुपये से कम नहीं है। इतना ही नहीं, नियुक्ति के दो माह से अधिक समय बीतने के बाद भी यह राशि भी उनको नहीं मिल पाई है। इसके अलावा उनको बीडीपीओ कार्यालय में सुबह 9 से 5 बजे तक बैठने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन आज तक उनकी न तो बैठने के लिए स्थायी व्यवस्था हो पाई है और न ही उनको कार्य के लिए लैपटॉप या कंप्यूटर मुहैया कराए गए हैं। तमाम मांगों को लेकर ऑपरेटर ने मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी उमाशंकर से मुलाकात की।
क्रीड की ओर से 10 अक्टूबर 2023 को ऑपरेटर पद के लिए नोटिस जारी किया गया। इसमें कंप्यूटर ज्ञान अनिवार्य था और कक्षा 12वीं पास योग्यता मांगी गई थी। आवेदन के बाद क्रीड ने उनकी दो लिखित परीक्षाएं ली थीं। इसमें कंप्यूटर ज्ञान समेत जनरल नॉलेज की परीक्षाएं थीं। अंतिम परीक्षा से पहले बकाया आवेदन के लिए 1000 रुपये प्रति आवेदक फीस ली गई। इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग भी थी। चयनितों का कहना है कि नोटिस में मानदेय को लेकर कोई राशि तय नहीं थी। जब मार्च में ऑफर लेटर दिए गए तो उनको बताया गया कि प्रति माह 6 हजार रुपये पंचायत विभाग से दिए जाएंगे। ऑफर लेटर में उनके पद का नाम अटल सेवा केंद्र ऑपरेटर कर दिया गया। पिछले दो माह से उनको न तो तय मानदेय मिल पाया है और न ही उनकी समस्याओं का कोई समाधान हो रहा है।
ऑपरेटरों की मांगें
सोनीपत निवासी सुंदर, रोहित, बलवंत समेत अन्य ऑपरेटरों ने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत होने वाली भर्ती में न तो लिखित परीक्षा होती है और 15 हजार से कम वेतन नहीं है। जबकि उनकी दो दो परीक्षाएं ली गई और मानदेय 6 हजार रखा गया। उनकी मांग की है कि उनको एचकेआरएन के तहत लिया जाए और मानदेय 20 हजार तय किया जाए। साथ ही ईएसआई और पीएफ की भी व्यवस्था की जाए। ऑपरेटर बुधवार को इस संबंध में मुख्यमंत्री से प्रधान सचिव वी उमाशंकर मिलकर अपनी समस्याओं का ज्ञापन दिया। वहीं, प्रधान सचिव वी उमाशंकर ने आचार संहिता लगने के चलते कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट पीपीपी
परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) हरियाणा सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इसकी शुरुआत की थी। हालांकि, पीपीपी में कुल 99 लाख 23 हजार शिकायतें सरकार को मिली हैं, जिनमें 94 लाख 55 हजार को ठीक किया जा चुका है। इसके अलावा टेलीफोन के माध्यम से भी दो लाख 82 हजार शिकायतें आई हैं। इनमें से दो लाख 63 हजार का निवारण किया जा चुका है। पहले पीपीपी में स्वघोषित डेटा था, जिसे बाद में सत्यापित कराया गया है। पीपीपी को अब जन्म, मृत्यु और शादी के रजिस्ट्रेशन से भी जोड़ दिया है और आय घटाने और बढ़ाने को लेकर लोगों को आपत्ति रहती है। इन त्रुटियों को ठीक कराने के लिए ही सरकार ने इन ऑपरेटर की भर्ती की है, ताकि ग्राम पंचायत कार्यालयों व बीडीपीओ ऑफिस में बैठक कर ये कंप्यूटर ऑपरेटर गलतियां सुधार सकें।