-हरियाणा में सियासी घमासान, तीन विधायकों के समर्थन वापसी को लेकर फंसा है पेंच
-कांग्रेस विधायक दल के नेता, उप नेता और तीनों विधायकों को भी नहीं मिला कोई संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के तीन निर्दलीय विधायकों के भाजपा सरकार के समर्थन वापस लेने के मामले में अब गेंद राज्यपाल के पाले में आ गई है। बुधवार रात राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय चंडीगढ़ राजभवन पहुंच गए। अब उनके निर्देश के बाद ही आगामी कार्यवाही होगी। सभी को राज्यपाल के फैसले का इंतजार है कि वह फ्लोर टेस्ट के लिए सरकार को सत्र बुलाने के लिए कहते हैं या नहीं। हालांकि, वीरवार को राज्यपाल कार्यालय से हरियाणा विधानसभा को कोई अनुशंसा पत्र नहीं मिला। वहीं, कांग्रेस विधायक दल के नेता, उप नेता और तीनों निर्दलीय विधायकों को भी इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला है कि उनका पत्र स्वीकार कर लिया गया है या नहीं।
पूंडरी से विधायक रणधीर सिंह गोलन, चरखी दादरी से विधायक सोमबीर सिंह सांगवान और नीलोखेड़ी से विधायक धर्मपाल गोंदर ने 7 मई को रोहतक में प्रेसवार्ता कर सरकार से समर्थन वापसी का एलान किया था। कांग्रेस विधायक दल के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुवाई में उन्होंने कांग्रेस को समर्थन देने की भी घोषणा की थी। तीनों ने हस्ताक्षर करके पत्र कांग्रेस नेताओं को सौंप दिया था। उस पत्र को राज्यपाल को भेजा गया, लेकिन दूसरे व्यक्ति की मेल आईडी से भेजे गए पत्र को राजभवन ने स्वीकार नहीं किया और उसे खारिज कर दिया था। इसके बाद, कांग्रेस विधायक दल के उप नेता आफताब अहमद और विधायक बीबी बतरा राजभवन में राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे, लेकिन राज्यपाल बाहर गए हुए थे। इस पर कांग्रेस विधायकों ने उनके कार्यालय में ज्ञापन दिया था। इसके बाद 15 मई को तीनों विधायकों ने नए सिरे से अपनी-अपनी ईमेल आईडी से राजभवन और विधानसभा सचिवालय पत्र भेजे। हालांकि, दो विधायकों के पत्र पर इस बार भी तारीख अंकित नहीं होने के चलते अब एक और पेच फंसा है। इनके अलावा पत्र में भाजपा से समर्थन वापसी का जिक्र तो है, लेकिन इसमें कांग्रेस को समर्थन देने की बात नहीं है। फिलहाल विधानसभा और कांग्रेस विधायकों और निर्दलीय विधायकों को राज्यपाल के फैसले का इंतजार है। उसके बाद ही सभी आगामी रणनीति बनाएंगे।
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25 तक चुनाव पर रहेगा सभी दलों का फोकस
लोकसभा चुनावों के प्रचार में मात्र सात दिन बचे हैं, ऐसे में सभी दलों ने पूरी ताकत के साथ जमीनी स्तर पर प्रचार शुरू कर दिया है। डोर टू डोर प्रचार से लेकर जनसभाएं करके मतदाताओं को साधने की कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में सभी दलों के विधायक चुनाव प्रचार में लगे हैं। इसलिए 25 मई तक यह मामला ठंडा रह सकता है। इससे पहले तीनों निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापसी के बाद से नायब सैनी सरकार अल्पमत में आ गई थी। कांग्रेस, जजपा और इनेलो दल राज्यपाल को पत्र लिख चुके हैं और राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर चुके हैं।