नाम है ईश्वर दत्त। उम्र 23 साल। न तो यह बोलता है, न रोटी मांगता है, न चलता है, न ही देखता है, न ही रोता है और न ही हंसता है। मानसिक रूप से विकलांग लगभग तीन फुट का यह बच्चानुमा युवक पिछले चार साल से पेंशन के लिए प्रमाण पत्र बनवाने की जद्दोजहद कर रहा है।
रोहतक से सोनीपत और सोनीपत से रोहतक तक बार-बार चक्कर काट रहे ईश्वर को एक बार फिर अब न्यूरोलॉजिस्ट से जांच कराने के लिए रोहतक जाने को कहा गया है। महज 1200 रुपये पेंशन पाने की आस में ईश्वर दत्त एक बार फिर 85 वर्षीय दादी की गोद में बैठकर रोहतक जाने की तैयारी में जुटा है।
दादा ने हार मानी, संभाली कमान
किसी ने दादा करतार सिंह से कहा कि इस तरह के बच्चों को सरकार पेंशन देती है। इसकी रोहतक पीजीआई ले जाकर न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करा लें। पेंशन पाने के लिए वह अपने दादा करतार सिंह के साथ पिछले चार सालों में चार बार रोहतक के चक्कर काट चुका है।
कुछ बात नहीं बनी तो दादा करतार सिंह ने हार थककर विकलांगता संबंधी कागजात लिफाफे में बंद करना उचित समझा। अब फिर किसी ने सामान्य अस्पताल आकर विकलांग प्रमाण पत्र बनाने की सलाह दी। ईश्वर की दादी सीता देवी ने फार्म भरने की प्रक्रिया पूरी की तो कुछ आस जगी।
डॉक्टर ने ईश्वर की पूरी जांच की तो उसे बौनापन के आधार पर 52 प्रतिशत की संख्या तो मिल गई, लेकिन अब डॉक्टर ने उसे फिर रोहतक जाकर न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क साधने की हिदायत दी है।
पेंशन के लिए जरूरी है 70 फीसदी अंक
200 रुपये की पेंशन पाने के लिए कागजी प्रक्रिया इतनी पेचीदा है कि कोई भी शख्स परेशान हो जाए। अस्पताल में ईश्वर की विकलांगता की जांच की गई, लेकिन पेंशन के लिए उसे और भी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा। 70 प्रतिशत विकलांगता पर ही पेंशन मिलती है।
ईश्वर की जांच कर चुके डॉ. एचपी शर्मा ने बताया कि उसे बौनेपन के आधार पर 52 प्रतिशत अंक मिले हैं। हालांकि न्यूरोलॉजिस्ट की जांच के बाद उसे जितने अंक मिलेंगे, उसी आधार पर वह पेंशन पाने का हकदार होगा। यहां विशेषज्ञ नहीं होने से उसे न्यूरोलॉजिस्ट से जांच के लिए रोहतक रेफर किया गया है।
दादी के सहारे जी रहा है ईश्वर
सोनीपत के जटवाड़ा मोहल्ला स्थित लुहारोवाली गली में ईश्वर दत्त अपने दादा और दादी के साथ रहता है। जन्म से ही विकलांग ईश्वर के पिता सत्यनारायण की लगभग 20 साल पहले बीकानेर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाद में उसकी मां की भी मौत हो गई।
तब से लेकर अब तक ईश्वर दादा करतार सिंह (90) के आसरे ही पल रहा है। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ ही दादा की भी आंखें कमजोर हो गई हैं। अब ईश्वर के आगे की जिंदगी दादी सीता देवी (85) के हवाले है। दादी को ही एक ही चिंता सता रही है कि आखिर मेरे जाने के बाद इसकी जिंदगी कौन देखेगा।