हरियाणा में सूखा व बाढ़ जैसे हालातों से निपटने के लिए सरकार ने 201 करोड़ की 212 नई योजनाओं को हरी झंडी दी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हरियाणा राज्य सूखा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 51वीं बैठक में इन नई योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। इन योजनाओं में अधिकांश आबादी के संरक्षण, कृषि भूमि की सुरक्षा, बाढ़ मशीनरी की खरीद, पुलों की मरम्मत और पुलों के दोबारा निर्माण की योजनाएं शामिल हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों और सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंताओं (एसई) को 30 जून तक सभी लघु अवधि योजनाओं को पूरा करने के लक्ष्य के साथ इन योजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि योजनाओं को क्रियान्वित करने से पूर्व निर्माण स्थलों का मौके पर जाकर स्वयं निरीक्षण करें।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पानी को नालियों में बर्बाद न किया जाए बल्कि इस पानी को सिंचाई के लिए उपयोग करने पर जोर दिया जाए। इसके अलावा उन्होंने मानसून के दौरान अधिकतम वर्षा जल के संरक्षण करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि बाढ़ से जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है, इसलिए किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए पूर्व की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 2 सालों से हरियाणा राज्य सूखा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की बैठक जनवरी माह में इसी उद्देश्य के साथ आयोजित की जा रही है, ताकि मानसून के सीजन में उत्पन्न होने वाली बाढ़ की स्थिति से निपटने की व्यवस्था समय रहते की जा सके।
मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश देते हुए कहा कि अपने-अपने जिलों में ऐसे 4 से 5 अति प्रवाह या सूखे तालाबों को चिह्नित करें, जिनका प्राथमिकता आधार पर जीर्णोद्धार करना है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि शिवधाम नवीकरण योजना के तहत शमशान घाटों और कब्रिस्तान में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की जाए और जहां कहीं कार्य लंबित हैं उन्हें जल्द से जल्द पूरा किया जाए।