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कोरोना का असर : चंडीगढ़ में निजी स्कूलों से मोह भंग, 19 हजार नए बच्चों ने सरकारी स्कूलों में लिया दाखिला

Fri, 04 Jun 2021 04:00 PM IST
निवेदिता वर्मा कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़। 

सार

महामारी के कारण कई अभिभावकों का रोजगार प्रभावित हुआ है। वहीं निजी स्कूलों ने फीस बढ़ा दी है। इन सबसे परेशान अभिभावकों ने बच्चों को निजी स्कूलों से हटाकर सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाया है। 
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सरकारी स्कूलों में बढ़ी बच्चों की संख्या - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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कोरोना महामारी के चलते आर्थिक तंगी का असर इस वर्ष चंडीगढ़ की स्कूली शिक्षा पर अधिक देखने को मिला है। शिक्षा विभाग के अनुसार 19 हजार नए बच्चों ने शहर के विभिन्न सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। लॉकडाउन के कारण कामकाज बंद होने और निजी स्कूलों की ओर से फीस बढ़ाने से परेशान अभिभावकों ने भी इस बार अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाया है। 

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इन बच्चों में एंट्री कक्षा के अलावा छठी और नौवीं कक्षा के बच्चे काफी अधिक हैं। एंट्री कक्षा में इस बार काफी बड़ी संख्या में बच्चों ने दाखिला लिया है। बहुत से स्कूलों में एंट्री कक्षा के लिए दो से तीन नए सेक्शन बनाए गए हैं। बड़ी कक्षाओं में भी सेक्शन बढ़ाए गए हैं। जानकारी के अनुसार अधिकतर बच्चे निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में आए हैं। 


पिछले वर्ष 4985 ने छोड़ा था निजी स्कूल
पिछले वर्ष 4985 विद्यार्थियों ने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया था। ये सभी विद्यार्थी पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ते वाले थे। पिछली बार भी कोरोना महामारी के संकट के बीच में निजी स्कूलों की फीस को लेकर मनमानी के कारण अभिभावक परेशान थे। इसलिए अभिभावकों ने सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए मन बनाया।

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लॉकडाउन के चलते आर्थिक हालत खराब

कोरोना के चलते लॉकडाउन के कारण घर के आर्थिक हालात खराब हो गए हैं। मेरा काम सिलाई का था, अब बहुत ही कम ग्राहक आते हैं और पति का भी फैक्ट्री में काम कम हो गया है। इसलिए हमने अपने दोनों बच्चों को गुरु हरकिशन स्कूल से हटवाकर सेक्टर-40 के सरकारी स्कूल में दाखिल करवाया है। - तरनजीत, अभिभावक

आर्थिक हालात ठीक नहीं, बच्चों को सरकारी स्कूलों में डाला 
मेरा पहले प्रिंटिग प्रेस का काम था, लेकिन पिछले वर्ष लॉकडाउन के कारण मेरा धंधा बंद हो गया। तब मैंने आठ महीने पहले किरयाने का काम शुरू किया। इतने समय बाद वह भी अब जाकर थोड़ा ठीक चलने लगा है। मेरे दोनों बच्चे शिशु निकेतन स्कूल- 22 में पढ़ते थे। स्कूल फीस में बढ़ोतरी के कारण मैंने दोनों का दाखिला निजी से हटवाकर सेक्टर-37 और 15 के सरकारी स्कूल में करवाया है। - मनीष सोनी, अभिभावक

काम बंद, निजी स्कूलों ने बढ़ाई फीस  
मेरा ओला बाइक का काम है, लेकिन कोरोना महामारी के बाद से पिछले वर्ष से मेरा काम लगभग बंद सा ही चल रहा है। मेरा बच्चा शिशु निकेतन में था, हम पिछले वर्ष की फीस भी जमा नहीं करवा पाए थे। वहीं इस बार स्कूल ने फीस में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी कर दी थी। इसलिए इस बार हमने सेक्टर-15 के सरकारी स्कूल में बच्चे को छठी कक्षा में दाखिला दिलवाया है। - अभय, अभिभावक

निजी में पढ़ाई कम.. खर्च ज्यादा  
मैंने बेटी का नौवीं कक्षा के लिए सेक्टर-35 और सेक्टर -37 के सरकारी स्कूल में दाखिले के लिए पत्र दिया हुआ है, लेकिन अभी तक किसी भी स्कूल की तरफ से दाखिले की पुष्टि नहीं की गई है। मेरा निवास स्थान 37 में है, ये दोनों स्कूल नजदीक हैं। पहले बेटी गुरु नानक स्कूल-36 में थी, लेकिन निजी स्कूलों की फीस बहुत ज्यादा और पढ़ाई कम है। इसलिए हम सरकारी में दाखिला चाहते हैं। - मनोज, अभिभावक

कंटेनमेंट जोन में आने पर डेढ़ माह रखा बंद, बच्चे के दाखिले की तारीख निकली  
धनास कच्ची कालोनी की अभिभावक रानो ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने अपने बच्चे का दाखिला छठी कक्षा में करवाना था, लेकिन उनके मकान के पीछे स्थित घर में एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया था। प्रशासन के दिशा निर्देशानुसार 14 दिन का कंटेनमेंट जोन बनता है, लेकिन हमें डेढ़ माह तक घरों में बंद कर रखा गया जबकि हमारे घर में कोई कोरोना संक्रमित भी नहीं था। इतने समय में बच्चे के दाखिले की तारीख भी निकल गई। इस कारण बच्चे का एक साल खराब हो गया है। इस बार उसे धनास के सरकारी स्कूल में दाखिला करवाया है। पहले वह सर्वहितकारी स्कूल में पढ़ता था। अब आर्थिक तंगी के कारण निजी स्कूल की फीस भरने का सामर्थ्य भी नहीं है।
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