चंडीगढ़। सुखना लेक के पीछे जंगल में रविवार सुबह सैर करने पहुंचे पर्यटक अचानक बारिश होने पर फंस गए। कमल लगे दलदल को पार करने की किसी की हिम्मत नहीं हुई। आखिरकार पर्यटकों ने पुलिस को फोन कर मदद मांगी। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मानव शृंखला बनाकर पंचकूला के दो परिवारों सहित कुल 15 लोगों को रेस्क्यू कर बचाया।
पंचकूला के सेक्टर-15 निवासी रमन वर्मा ने बताया कि वह साइक्लिस्ट हैं और प्रतिदिन लगभग 40 किमी साइकिल चलाते हैं। उनके एक परिचित ने बताया था कि सुखना लेक स्थित जंगल में पीछे की तरफ घूमने का काफी अच्छा स्थान है। इसके बाद रमन अपने दो साल व चार साल के दो बच्चों व पत्नी के साथ अनजान रास्ते पर जाने को तैयार हो गए। इस दौरान उन्होंने पंचकूला के सेक्टर-9 निवासी अपने दोस्त कृष्ण गोयल व उनके परिवार को भी ले लिया। कुल छह लोग कार से सुखना लेक पहुंचे और गाड़ी पार्क कर पैदल ही जंगल की तरफ निकल गए। लगभग ढाई किमी तक जाने के बाद अचानक तेज बारिश होने लगी। इसके बाद सभी जंगल में ही रुक गए। थोड़ी देर बाद कच्चे रास्ते पर चलना मुश्किल हो गया। रमन ने बताया कि पीछे जाने की अपेक्षा एक किमी आगे चले जाना बेहतर समझा, लेकिन आगे जाने पर देखा कि सामने कमल के फूलों से भरा एक दलदल है। वहां पहले ही 8 से 9 लोग खड़े थे, जो फंसे हुए थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस को फोन किया। इस दौरान सुखना चौकी पर तैनात बलराम सिंह राणा, निरीक्षक पवन व अन्य लोगों ने मानव शृंखला बनाकर सभी को सकुशल बाहर निकाला।
चालान के डर से दौड़ने लगे लोग
जिस क्षेत्र में लोग सैर के लिए गए थे, वहां जाना मना है। इसके बावजूद लोग वहां सैर करने पहुंच गए। लोगों ने पुलिस को तो बुला लिया, लेकिन जैसे ही सबको बाहर निकाला गया, सभी चालान के डर से भागने लगे। इस दौरान कुछ पुलिस वालों को चोट भी लग गई। हालांकि पंचकूला के दोनों परिवारों ने पुलिस को धन्यवाद किया।
यह कैसी सख्ती, प्रतिबंध के बावजूद जंगल में घुस गए लोग
सुखना रेगुलेटरी और लेक फॉरेस्ट में इस समय जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहता है। खासकर कमल के दलदल वाला कुल 7 किमी का रास्ता है, वहां भी रोक है। पुलिस व वन विभाग की सख्ती के बावजूद इतनी संख्या में आखिर लोग वहां कैसे पहुंचे यह बड़ा सवाल है। इसमें किसकी लापरवाही है, यह भी जांच का विषय है।
मामले की जांच कराई जाएगी : देवेंद्र दलाई
मुख्य वन संरक्षक देवेंद्र दलाई ने कहा कि देशभर के जंगलों में इस समय जाने पर रोक रहती है, क्योंकि इस समय पेड़ों के बढ़ने का समय होता है, इसलिए उन्हें किसी तरह का नुकसान न हो इसका ध्यान रखा जाता है। वहीं बारिश के मौसम में सांप भी काफी निकलते हैं। लोगों को किसी प्रकार की कोई समस्या न आए, इसलिए यह क्षेत्र पूरी तरह बंद रहता है। इसकी जांच कराई जाएगी कि लोग आखिर अंदर कैसे घुसे। फिर भी लोगों से अपील है कि इस तरह का जोखिम न उठाएं।