इस दौरान करीब 325 एंबुलेंस सड़क किनारे खड़ी रहीं और मरीजों के परिजन एंबुलेंस के लिए इधर-उधर भटकते रहे। राज्य में 108 सेवा पूरी तरह से ठप है। आपात स्थिति में फंसे मरीजों के परिजन बार-बार 108 नंबर डायल करते रहे। मगर कई बार फोन करने के बाद भी कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। लुधियाना समेत राज्य के लगभग सभी जिलों में मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों को निजी एंबुलेंस, टैक्सी और ऑटो रिक्शा का सहारा लेना पड़ा।
वहीं निजी एंबुलेंस कर्मी मौके का फायदा उठा मरीजों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। देर शाम तक भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू), प्राइवेट एंबुलेंस यूनियन और राजस्थान एंबुलेंस इंप्लाइज एसोसिएशन भी 108 एंबुलेंस इंप्लाइज एसोसिएशन के समर्थन में उतर चुकी है।
कल 12 बजे तक सीएम से मुलाकात नहीं तो हाईवे जाम करेंगे एंबुलेंस कर्मी
15 हजार 108 एंबुलेंस कर्मचारी अब सरकार से आरपार की लड़ाई में उतर आए हैं। लुधियाना में धरने पर बैठे 108 एंबुलेंस इंप्लॉयज एसोसिएशन पंजाब ने शुक्रवार को एलान किया कि रविवार 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे तक उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री से नहीं होती है तो रविवार से ही पंजाब के हाईवे जाम कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही निजी एंबुलेंस संगठन भी हड़ताल के समर्थन में आ गए हैं।
शुक्रवार को यूनियन के सैकड़ों कर्मचारी हड़ताल पर बैठे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। 108 एंबुलेंस इंप्लॉयज एसोसिएशन पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष मनप्रीत सिंह निज्जर ने बताया कि 12 जनवरी को उनकी पंजाब के सेहत मंत्री डॉ. बलवीर सिंह के साथ बैठक हुई, जिसमें उन्हें शुक्रवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात का आश्वासन दिया गया लेकिन सीएम उनसे मिलने नहीं आए और न ही सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई गौर किया गया।
बठिंडा में भी हड़ताल से लोग परेशान
बठिंडा में 108 एबुलेंस सेवा नहीं चलने से आर्थिक तौर पर कमजोर परिवारों के लोगों को सर्वाधिक परेशानी झेलनी पड़ रही, क्योंकि उक्त सेवा आपातकाल में ऐसे परिवारों के लिए निशुल्क दी जाती है। वहीं हाईवे व सड़कों के किनारे होने वाले हादसों में घायल लोगों को भी सामाजिक संस्थाओं की एंबुलेंस सेवा का सहारा लेना पड़ रहा है।
वहीं ज्यादातर मरीजों को निशुल्क एंबुलेंस सेवाएं नहीं मिलने से उन्हें भारी भरकम खर्च कर निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है। प्राइवेट एंबुलेंस चालक लोगों ने मनमाने पैसे वसूल रहे हैं। शहर में ही पांच किलोमीटर के दायरे में ही मरीजों से दो से ढाई हजार की वसूली की जा रही है। उधर, यूनियन ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
ये हैं हड़ताली कर्मचारियों की मांगें
- सभी 108 एंबुलेंस को सरकार अपने अधीन करे
- निष्कासित कर्मचारियों को बहाल करने की मांग
- हरियाणा के तर्ज पर 35 से 40 हजार मिले वेतन
- सभी कर्मचारियों का 50 लाख रुपये का बीमा
- 12 के बजाय ड्यूटी आठ घंटे की हो