भारतीय सेना में सिख रेजिमेंट, सिख लाइट इन्फेंट्री और पंजाब रेजिमेंट सिख पहचान का हिस्सा हैं। इन्होंने सिख गौरव के साथ देश की सेवा की है। उन्होंने कहा कि यह भारत की विशिष्टता है कि यहां रहने वाले विभिन्न समुदायों के लोग अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों का पालन करते हुए देश के लिए योगदान करते हैं।
भारतीय सेना में भी सिख सैनिकों ने हमेशा पगड़ी का गौरव बनाए रखा है और अगर सिख सैनिकों के लिए नई लोहे के टोपी वाले हेलमेट की योजना लागू की जाती है तो इससे सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी और सिख परंपराओं का उल्लंघन होगा। एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सिख सैनिकों के लिए शुरू की जा रही नई हेलमेट नीति को तुरंत वापस लेने की मांग की, ताकि रक्षा सेवाओं में सिखों की विशिष्ट पहचान बनी रहे।
दूसरी ओर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भी केंद्र सरकार की सिखों को लोहे के विशेष तरह के हेलमेट पहनने की योजना को लागू करने का विरोध जताया और इस फैसले को सिख विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि सिख सैनिकों को हेलमेट पहनाने की कोशिश की जा रही है। अंग्रेज सरकार ने भी दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हेलमेट पहनाने की कोशिश की थी, जिसका सिखों ने विरोध किया था। दस्तार की जगह किसी भी तरह की टोपी पहनना सिख सिद्धांतों का हनन है।