सेवाओं में देरी को लेकर हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने तीन जिला वन अधिकारियों, राम कुमार जांगड़ा, आरएस ढुल और जयकुमार नरवाल को पर्यवेक्षी चूक का दोषी ठहराते हुए एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही नोटिस के 30 दिनों के भीतर जुर्माना राशि राज्य के खजाने में जमा करवाने का निर्देश भी दिया है। जिन मामलों में डीएफओ के अलावा अन्य अधिकारियों की ओर से देरी की पहचान की गई थी, आयोग अब उन्हें नोटिस जारी करेगा और उनका पक्ष सुनने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
एक मामले में आयोग ने दो अधिसूचित सेवाओं- ‘पेड़ों की कटाई की अनुमति’ और ‘पीएलपीए या वन या प्रतिबंधित भूमि के संबंध में एनओसी’ के लंबित मामलों में वन विभाग के 14 अधिकारियों को अपने रडार पर लिया था। आयोग ने जुलाई-2020 और दिसंबर-2021 के बीच की समयावधि के दौरान 688 मामलों की पहचान की, जहां देरी पाई गई।
रिपोर्ट पर तुरंत संज्ञान लेते हुए आयोग ने कोविड लहर में ढुलमुल रवैया अपनाने पर लगभग 450 से अधिक मामलों के लिए 14 जिला वन अधिकारियों (डीएफओ) को स्वत: संज्ञान नोटिस जारी किया। सभी अधिकारियों को 19 अप्रैल, 2022 को आयोग के समक्ष सुनवाई के लिए बुलाया गया। उपरोक्त दोनों सेवाओं के लिए अधिसूचित समय-सीमा 15 कार्य दिवस है लेकिन अधिसूचित समय-सीमा के बारे में अधिकारियों की दलील पर विचार करते हुए, आयोग ने उन मामलों को माफ कर दिया जहां विभाग को समय-सीमा में आवश्यकतानुसार 30 कार्य दिवसों तक संशोधन करवाने की सलाह दी गई थी।
सुनवाई के दौरान उपस्थित अधिकारियों की दलीलों के आधार पर रेंज अधिकारी, डीएफओ और वन संरक्षक के स्तर पर देरी पाई गई। लिखित जवाब और बताए गए कारणों की समीक्षा के बाद आयोग ने उन पर जुर्माना किया है। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने कहा कि आमजन को अधिसूचित सेवाओं के वितरण में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।