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पीजीआई में बड़ा घपला, पढ़कर चौंक जाएंगे आप

Mon, 02 Jun 2014 03:52 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मरीजों की सहूलियत के लिए पीजीआई को हास्पिटल इंफॉरमेशन सिस्टम प्रोजेक्ट को साल 2008 से लेकर 2009 के बीच तीन चरणों में पूरा करना था। डेडलाइन खत्म हुए छह साल बीत गए हैं, लेकिन अब तक एक भी चरण पूरा नहीं हो पाया है। प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने की जिम्मेदारी सी-डेक कंपनी को दी गई थी। यही नहीं करार के दौरान देरी के लिए पेनल्टी तय की गई थी। उसके मुताबिक करीब सात करोड़ 14 लाख की पेनल्टी बनती है। लेकिन पीजीआई ने एक भी रुपया आईटी कंपनी से नहीं वसूला। यह बात डायरेक्टर जनरल ऑफ ऑडिट ने अपने सालाना ऑडिट में उजागर की है।
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28 मार्च 2007 को पीजीआई और सीडेक के बीच हास्पिटल को कंम्प्यूटराइज्ड करने का करार किया गया था। इसके मुताबिक पहला चरण 24 मार्च 2008 को, दूसरा चरण 24 सितंबर 2008 को और तीसरा चरण 24 मार्च 2009 को पूरा होना था। साल 2014 आ चुका है, लेकिन अब तक पहला चरण ही पूरा नहीं हो पाया।

पीजीआई ने इस पर पेनल्टी तो वसूली नहीं, ऊपर से 11.62 करोड़ रुपये दस मार्च साल 2013 को सी-डेक कंपनी को दे दिए। रिपोर्ट कहती है कि जब काम पूरा नहीं हुआ था, तो रुपये नहीं देने चाहिए थे।
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2011 में उठा था मुद्दा, फिर भी कार्रवाई नहीं

प्रोजेक्ट पूरा नहीं होने पर साल 2011 में यह मुद्दा उठाया गया था। इस पर जवाब तलब होने पर 16 मार्च 2011 को पीजीआई ने एक कमेटी गठित की थी। उस दौरान कमेटी को पूरे मुद्दे को सभी एंगल से देखने के लिए निर्देश जारी किए गए थे।

करीब तीन साल बीत गए, लेकिन कमेटी की ओर से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। यदि उसी दौरान गंभीरता से इस मुद्दे को देख लिया जाता तो अब तक प्रोजेक्ट पूरा होने के आसार होते।

किस चरण पर कितनी पेनल्टी लगाई गई
चरण..............प्रोजेक्ट पूरे होने का समय........पेनल्टी
पहला चरण........24 अप्रैल 2008........5,83,73,660
दूसरा चरण........24 अक्तूबर 2008........73,79,568
तीसरा चरण........24 अप्रैल  2008........56,49,897
कुल पेनल्टी........7,14,03,125 रुपये

करनी थी पेमेंट 50 प्रतिशत, कर दी 70 प्रतिशत

करार के मुताबिक काम शुरू होने के बाद आईटी कंपनी सीडेक को 50 प्रतिशत पेमेंट देनी थी। सभी चरणों के पूरा होने पर बाकी 40 प्रतिशत राशि कंपनी को देनी चाहिए थी। जब पूरे काम की समीक्षा हो जाती तो तब बाकी बची दस प्रतिशत राशि दी जाती। लेकिन पीजीआई ने इस काम में काफी जल्दबाजी दिखाई। पीजीआई ने कंपनी को 50 प्रतिशत के बजाय 70 प्रतिशत पेमेंट दे दी। करीब 20 प्रतिशत ज्यादा। इससे पीजीआई ने कंपनी को करीब एक करोड़ 29 लाख रुपये ज्यादा दे दिए।

कम्प्यूटराइज सिस्टम होने से मरीजों को ये होता फायदा

1. घर बैठे ओपीडी में करवा सकते थे रजिस्ट्रेशन
2. ओपीडी और इमरजेंसी के मरीजों की रिपोर्ट ऑनलाइन होती
3. मेडिकल रिपोर्ट पीजीआई वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त कर सकता था
4. मेडिकल रिपोर्ट की जानकारी एसएमएस से मिल सकती थी
5. ड्रग की जानकारी ऑनलाइन मिलती
6. रेडियोडायग्नोस्टिक मशीने ऑनलाइन होती
7. ब्लड बैंक ऑनलाइन होना था
(नोट: सभी काम प्रोसेस में हैं। इसकी जानकारी कुछ दिन पहले पीजीआई के डायरेक्टर ने एक प्रेस कांफ्रेंस में भी दी थी। )
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पीजीआई एक नजर में

20 लाख से ज्यादा मरीज हर साल आते हैं
08 हजार मरीज हर दिन ओपीडी में दिखाने आते हैं
02 हजार बेड पीजीआई में स्थापित किए गए हैं
170 मरीज रोजाना इमरजेंसी में आते हैं
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