आईपीयू के प्राइवेट कॉलेज में फीस वृद्धि का आदेश दिल्ली सरकार ने वापस लेने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा है कि आईपीयू कॉलेजों में फीस वृद्धि का आदेश वापस लिए जाने की फाइल उपराज्यपाल को भेज दी है।
उम्मीद है स्वीकृति मिल जाएगी,जिसके बाद मैं बढ़ी फीसदी रोकने का आदेश जारी कर दूंगा। मुख्यमंत्री ने भी ट्वीट कर कहा है कि अगर बढ़ी फीस के नाम पर छात्रों को सताया जा रहा है तो सीधे मुझसे मिलें।
दिल्ली सरकार के उच्च शिक्षा निदेशक शिव कुमार ने 19 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी किया जिसमें कहा गया है कि कमेटी ने 2013-16 फीस वृद्धि पर सिफारिश दी है।
उसे दिल्ली सरकार ने 2014-17 के लिए अधिसूचित किया। यह अधिसूचना उपराज्यपाल की स्वीकृति से जारी की गई थी। यही वजह है कि फीस वापसी का आदेश भी उपराज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद ही होगा।
अधिसूचना के अनुसार फीस वृद्धि चार साल और पांच साल के कोर्स के मामले में पूरे सत्र के लिए लागू मानी जाएगी। इसका प्रभाव आईपीयू के 74 प्राइवेट कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों पर पड़ना है लेकिन बीते वर्षों की फीस प्राइवेट कॉलेजों की तरफ से लिए जाने से छात्रों में नाराजगी थी।
मुख्यमंत्री ने एक अन्य ट्वीट में कहा-आईपीयू के छात्रों ने सुबह मुलाकात की थी, परेशान ना हों, फाइल उपराज्यपाल के पास भेजी गई है, उम्मीद है कल फीस वृद्धि का आदेश रद्द हो जाएगा। मुख्यमंत्री के ट्वीट को लेकर छात्रों को राहत मिली है। लेकिन विरोध में जुटे छात्रों का कहना है कि फीस वृद्धि के बाद कॉलेजों में हाजिरी कम हो गई है। अगर आदेश वापस नहीं हुआ तो फिर विरोध प्रदर्शन शुरू होगा।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उच्च शिक्षा निदेशक को आदेश दिया है कि आईपीयू प्रशासन को यह निर्देश दें कि फीस वृद्धि के मामले में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री से मिलकर पीड़ा बताने वाले छात्रों के खिलाफ कोई भी कॉलेज कार्रवाई न करें। अगर कोई प्राइवेट कॉलेज या संस्थान छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करेगा तो सरकार उसे गंभीरता से लेगी और उस कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सिसोदिया ने कहा कि उन्होंने कानूनी राय ली है, छात्रों को अपने मूलभूत अधिकार को लेकर विरोध करने और मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री से मिलने और फीस वृद्धि का आदेश जारी किए जाने के पहले से लागू किए जाने का शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है। जबकि ऐसी सूचनाएं मीडिया में आ रही हैं कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने का हवाला देकर धमकाया जा रहा है।