चंडीगढ़ के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल, प्राइवेट कोचिंग सेंटर और अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए प्रशासन ने सख्त फरमान निकाला है। इनमें पढ़ाने वाले टीचर्स सहित पूरे स्टाफ का वेरिफिकेशन किया जाए। पीजी में रहकर कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स का भी वेरिफिकेशन कर उनकी लिस्ट बनाई जाए। साइबर कैफे में आने वाले स्टूडेंट्स पर नजर रखने के लिए कैफे संचालकों के साथ हर महीने रूटीन बैठक भी हो। ये निर्देश शुक्रवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने मलोया स्थित स्नेहालय में यूटी के अफसरों को दिए।
आयोग के सदस्य प्रियंक ने कहा कि केंद्र सरकार नई शिक्षा पॉलिसी बनाने जा रही है। इसे अगले वर्ष से लागू कर दिया जाएगा। इसके तहत देशभर के स्कूलों और कोचिंग सेंटरों के टीचरों सहित अन्य स्टाफ जो सीधे तौर पर स्टूडेंट्स से जुड़ें हैं। उनका वेरिफिकेशन कर रिकार्ड बनाया जाएगा। देशभर में बच्चों के साथ बढ़ती आपराधिक वारदात के मद्देनजर ऐसा किया जा रहा है। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग सेंटरों के शिक्षक जो दूसरे शहरों में पढ़ाने जाते हैं, उनकी पहचान और जहां वह रहते हैं, वहां का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी तौर पर कराया जाएगा।
प्रियंक के अनुसार यूटी प्रशासन को केंद्र सरकार की ओर से संबंधित आदेश जल्द ही मिल जाएंगे। इसके लिए उन्होंने शिक्षा विभाग को सर्कुलर जारी करने के आदेश दिए हैं। साथ ही इसे अगले सेशन से पहले हर हाल में पूरा करने को कहा है। उन्होंने डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन अफसर से ऐसे बच्चों का सर्वे कराकर उनका रिकॉर्ड बनाने को कहा जो सड़क किनारे, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों सहित अन्य इस तरह के स्थानों पर रहते हैं और स्कूल नहीं जाते हैं।
वहीं पुलिस की ओर से मीटिंग में शामिल हुए एसएचओ मलोया राम रतन शर्मा को कोचिंग सेंटरों के आसपास के सभी पीजी, हॉस्टल और जहां भी बाहर के बच्चे किराए पर रह रहे हों उनका वेरिफिकेशन कराने को कहा। अगर ऐसे में कोई पॉक्सो एक्ट का मामला सामने आता है तो उसकी सूचना स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स कमेटी को देने को कहा। साथ ही ऐसे एरिया के सभी साइबर कैफे संचालकों के साथ नियमित तौर पर बैठक कर उनसे नाबालिग बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल की जानकारी लेने को कहा।